Shri Guru Granth Sahib (Set of 4 Volumes)
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आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब सिख धर्म का पवित्रतम और केन्द्रीय ग्रंथ है, जो अब हिंदी भाषी पाठकों के लिए चार खंडों में उपलब्ध है। इस संस्करण का अनुवाद डॉ. मनमोहन सहगल द्वारा किया गया है, जो देवनागरी लिपि में अत्यंत सरल और बोधगम्य भाषा में प्रस्तुत किया गया है। यह अनुवाद न केवल सटीक है, बल्कि मूल भाव, श्रद्धा और आध्यात्मिक गहराई को भी सहजता से अभिव्यक्त करता है। इस ग्रंथ की भाषा में हिंदी, भोजपुरी, पंजाबी, हिंदुस्तानी, अरबी और फारसी शब्दों का सुंदर समावेश है, जिससे यह विविध भाषाई पृष्ठभूमियों वाले पाठकों के लिए भी सहज रूप से ग्राह्य बनता है।
इस चार खंडों वाले सेट में कुल 3,878 पृष्ठ हैं, और इसे आकर्षक हार्डकवर स्वरूप में प्रकाशित किया गया है। इसका प्रकाशन भुवन वाणी ट्रस्ट, लखनऊ द्वारा किया गया है। प्रत्येक खंड में सिख गुरुओं — विशेष रूप से गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु तेगबहादुर जी तक — की वाणी संकलित है। ये वाणियाँ हमें जीवन के उच्च आदर्शों, आत्मज्ञान, करुणा, सत्य, और ईश्वरभक्ति की प्रेरणा देती हैं।
यह ग्रंथ केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं है, बल्कि यह मानवता, समानता, और एक ईश्वर में विश्वास का सशक्त प्रतीक है। इसके उपदेश जात-पात, भेदभाव और संकीर्णताओं को मिटाकर सभी को एक समान देखने की प्रेरणा देते हैं। हिंदी भाषा में इस ग्रंथ का रूपांतरण उन लाखों पाठकों के लिए एक अमूल्य अवसर है जो गुरबाणी के गूढ़ अर्थों को अपनी मातृभाषा में समझना चाहते हैं। यह पुस्तक केवल पठन के लिए नहीं, बल्कि मनन और आत्मचिंतन के लिए भी एक अनमोल निधि है।
आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब सिख धर्म का पवित्रतम और केन्द्रीय ग्रंथ है, जो अब हिंदी भाषी पाठकों के लिए चार खंडों में उपलब्ध है। इस संस्करण का अनुवाद डॉ. मनमोहन सहगल द्वारा किया गया है, जो देवनागरी लिपि में अत्यंत सरल और बोधगम्य भाषा में प्रस्तुत किया गया है। यह अनुवाद न केवल सटीक है, बल्कि मूल भाव, श्रद्धा और आध्यात्मिक गहराई को भी सहजता से अभिव्यक्त करता है। इस ग्रंथ की भाषा में हिंदी, भोजपुरी, पंजाबी, हिंदुस्तानी, अरबी और फारसी शब्दों का सुंदर समावेश है, जिससे यह विविध भाषाई पृष्ठभूमियों वाले पाठकों के लिए भी सहज रूप से ग्राह्य बनता है।
इस चार खंडों वाले सेट में कुल 3,878 पृष्ठ हैं, और इसे आकर्षक हार्डकवर स्वरूप में प्रकाशित किया गया है। इसका प्रकाशन भुवन वाणी ट्रस्ट, लखनऊ द्वारा किया गया है। प्रत्येक खंड में सिख गुरुओं — विशेष रूप से गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु तेगबहादुर जी तक — की वाणी संकलित है। ये वाणियाँ हमें जीवन के उच्च आदर्शों, आत्मज्ञान, करुणा, सत्य, और ईश्वरभक्ति की प्रेरणा देती हैं।
यह ग्रंथ केवल एक धार्मिक पुस्तक नहीं है, बल्कि यह मानवता, समानता, और एक ईश्वर में विश्वास का सशक्त प्रतीक है। इसके उपदेश जात-पात, भेदभाव और संकीर्णताओं को मिटाकर सभी को एक समान देखने की प्रेरणा देते हैं। हिंदी भाषा में इस ग्रंथ का रूपांतरण उन लाखों पाठकों के लिए एक अमूल्य अवसर है जो गुरबाणी के गूढ़ अर्थों को अपनी मातृभाषा में समझना चाहते हैं। यह पुस्तक केवल पठन के लिए नहीं, बल्कि मनन और आत्मचिंतन के लिए भी एक अनमोल निधि है।
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