Premchand Ki Hindu-Muslim Sadbhav Kathayen
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राम रहीमा एक है, नाम धराया दोय ।
कहै कबीर दो नाम सुनि, भरम परौ मति कोय ॥
कबीर
हिन्दू और मुस्लिम समुदाय भारत में कोई हज़ार वर्ष से साथ रहते आ रहे हैं। इनके सहजीवन को देश के सांस्कृतिक वातावरण में देखा गया है। कबीर हों या प्रेमचंद, सभी रचनाकारों ने धर्म आधारित विभाजन को अस्वीकार कर आपसी सद्भावना पर बल दिया है। प्रेमचंद के विशाल कथा संसार से साझा संस्कृति की ऐसी कहानियों को चुनकर पाठकों के लिए यह संग्रह तैयार किया गया है। प्रेमचंद की इन कहानियों में भारत के हिन्दू और मुस्लिम समुदायों का सह जीवन और सांस्कृतिक जुड़ाव देखा जा सकता है।
राम रहीमा एक है, नाम धराया दोय ।
कहै कबीर दो नाम सुनि, भरम परौ मति कोय ॥
कबीर
हिन्दू और मुस्लिम समुदाय भारत में कोई हज़ार वर्ष से साथ रहते आ रहे हैं। इनके सहजीवन को देश के सांस्कृतिक वातावरण में देखा गया है। कबीर हों या प्रेमचंद, सभी रचनाकारों ने धर्म आधारित विभाजन को अस्वीकार कर आपसी सद्भावना पर बल दिया है। प्रेमचंद के विशाल कथा संसार से साझा संस्कृति की ऐसी कहानियों को चुनकर पाठकों के लिए यह संग्रह तैयार किया गया है। प्रेमचंद की इन कहानियों में भारत के हिन्दू और मुस्लिम समुदायों का सह जीवन और सांस्कृतिक जुड़ाव देखा जा सकता है।
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