कांग्रेस का इतिहास: History of Congress (1885 - 1947) Set of 3 Volumes
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डॉ. बी. पट्टाभि सीतारामय्या द्वारा लिखित ‘कांग्रेस का इतिहास’ का यह नया संस्करण पाठकों को सौंपते हुए अति प्रसन्नता हो रही है, क्योंकि यह पुस्तक न सिर्फ कांग्रेस का इतिहास है बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास भी है। निस्संदेह आजादी के आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका से आज की पीढ़ी को परिचित होना चाहिए। यह पुस्तक पट्टाभि सीतारामय्या द्वारा मूल अंग्रेजी में दो खंडों में लिखित पुस्तक का अनुवाद है, जिसे सुविधानुसार हिंदी में तीन खंड का कर दिया गया है। इस प्रसिद्ध पुस्तक के हिंदी संस्करण के पहले खंड की प्रस्ताबना देश के प्रथम राष्ट्रपति एवं महान स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने लिखी है।
सस्ता साहित्य मण्डल के लिए यह हर्ष का विषय रहा है कि इसके हिंदी संस्करण का प्रकाशन का गौरव प्राप्त हुआ। इस हिंदी संस्करण के प्रकाशन में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के अलावा श्री देवदास गांधी जी की भूमिका भी उल्लेखनीय है। तत्कालीन मण्डल के मंत्री श्री हरिभाऊ उपाध्याय ने सीमित संसाधनों के बावजूद इस कार्य को अंजाम तक पहुँचाया। इस पुस्तक के अनुवाद के सहयोगी सर्वश्री बलराज बौरी एम.ए., सुरेश शर्मा, राधेश्याम शमां, ठाकुर राजबहादुर सिंह आदि की भूमिका को भी याद करना चाहता हूँ। इनके परिश्रम के फलस्वरूप हिंदी संस्करण भी अंग्रेजी जैसा लोकप्रिय हुआ।
जैसा कि प्रस्तावना में लिखा है कि बीसवीं सदी ने एक नया ही ध्येय प्राप्त कर लिया और पा लिया है, एक नया झंडा और नया नेता। और इन पृष्ठों में भारत की आजादी के पवित्र ध्येय के प्रति संसार की प्रतिक्रिया का वर्णन किया गया है। उसकी आजादी के राष्ट्रध्वज के परिवर्तन और स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए भारत के राष्ट्रव्यापी संघर्ष का नेतृत्व करनेवाले महात्मा गांधी के महान उपदेश और उनकी योजना का भी इसमें समावेश है। निस्संदेह यह पुस्तक गांधी के व्यक्तित्व का भी मूल्यांकन प्रस्तुत करती है।
इन तीनों खंडों में कांगेस के जन्म अर्थात् 1885 ई. से लेकर आजादी (1947 ई. तक) का इतिहास समाविष्ट है। हमारी योजना चौथे खंड को प्रकाशित करने की भी है जिसमें आजादी के बाद के कांग्रेस का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाएगा।
डॉ. बी. पट्टाभि सीतारामय्या द्वारा लिखित ‘कांग्रेस का इतिहास’ का यह नया संस्करण पाठकों को सौंपते हुए अति प्रसन्नता हो रही है, क्योंकि यह पुस्तक न सिर्फ कांग्रेस का इतिहास है बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास भी है। निस्संदेह आजादी के आंदोलन में कांग्रेस की भूमिका से आज की पीढ़ी को परिचित होना चाहिए। यह पुस्तक पट्टाभि सीतारामय्या द्वारा मूल अंग्रेजी में दो खंडों में लिखित पुस्तक का अनुवाद है, जिसे सुविधानुसार हिंदी में तीन खंड का कर दिया गया है। इस प्रसिद्ध पुस्तक के हिंदी संस्करण के पहले खंड की प्रस्ताबना देश के प्रथम राष्ट्रपति एवं महान स्वतंत्रता सेनानी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने लिखी है।
सस्ता साहित्य मण्डल के लिए यह हर्ष का विषय रहा है कि इसके हिंदी संस्करण का प्रकाशन का गौरव प्राप्त हुआ। इस हिंदी संस्करण के प्रकाशन में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के अलावा श्री देवदास गांधी जी की भूमिका भी उल्लेखनीय है। तत्कालीन मण्डल के मंत्री श्री हरिभाऊ उपाध्याय ने सीमित संसाधनों के बावजूद इस कार्य को अंजाम तक पहुँचाया। इस पुस्तक के अनुवाद के सहयोगी सर्वश्री बलराज बौरी एम.ए., सुरेश शर्मा, राधेश्याम शमां, ठाकुर राजबहादुर सिंह आदि की भूमिका को भी याद करना चाहता हूँ। इनके परिश्रम के फलस्वरूप हिंदी संस्करण भी अंग्रेजी जैसा लोकप्रिय हुआ।
जैसा कि प्रस्तावना में लिखा है कि बीसवीं सदी ने एक नया ही ध्येय प्राप्त कर लिया और पा लिया है, एक नया झंडा और नया नेता। और इन पृष्ठों में भारत की आजादी के पवित्र ध्येय के प्रति संसार की प्रतिक्रिया का वर्णन किया गया है। उसकी आजादी के राष्ट्रध्वज के परिवर्तन और स्वाधीनता प्राप्त करने के लिए भारत के राष्ट्रव्यापी संघर्ष का नेतृत्व करनेवाले महात्मा गांधी के महान उपदेश और उनकी योजना का भी इसमें समावेश है। निस्संदेह यह पुस्तक गांधी के व्यक्तित्व का भी मूल्यांकन प्रस्तुत करती है।
इन तीनों खंडों में कांगेस के जन्म अर्थात् 1885 ई. से लेकर आजादी (1947 ई. तक) का इतिहास समाविष्ट है। हमारी योजना चौथे खंड को प्रकाशित करने की भी है जिसमें आजादी के बाद के कांग्रेस का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाएगा।
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