वेदों का सम्पूर्ण संग्रह 4 खण्डों में I Complete 4 Volume Set of Veda In Hindi
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ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का यह संपूर्ण वेद-भाष्य वेदों के महान विद्वानों—महर्षि दयानंद सरस्वती, दामोदर सातवलेकर एवं सायण टीका पर आधारित है। इस महत्त्वपूर्ण ग्रंथ का संपादन विद्वान सत्यवीर शास्त्री जी ने किया है।
इस संपूर्ण भाष्य में कुल ३६४४ पृष्ठ हैं, जिसमें चारों वेदों का विस्तारपूर्वक अर्थ एवं व्याख्या दी गई है। वेदों का यह भाष्य वेदों के गूढ़ रहस्यों को स्पष्ट करता है और आम पाठकों के लिए सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। यह ग्रंथ उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो वेदों का अध्ययन करना चाहते हैं लेकिन संस्कृत में पारंगत नहीं हैं। इसमें प्रत्येक मंत्र का सरल एवं स्पष्ट अर्थ दिया गया है, जिससे सामान्य हिंदी जानने वाला व्यक्ति भी इसे आसानी से पढ़ और समझ सकता है।
महर्षि दयानंद सरस्वती के वेदों पर किए गए गहन अध्ययन और उनके प्रबुद्ध व्याख्यानों को इस भाष्य में विशेष रूप से स्थान दिया गया है। दामोदर सातवलेकर एवं सायण की टीका के आधार पर इसमें वेदों की प्रामाणिक व्याख्या प्रस्तुत की गई है, जिससे यह ग्रंथ वेदों को समझने के इच्छुक सभी पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बन जाता है।
संक्षेप में, यह वेद-भाष्य वेदों के ज्ञान को सरल भाषा में प्रस्तुत करने का एक अद्भुत प्रयास है, जो हर जिज्ञासु पाठक के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।
ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद का यह संपूर्ण वेद-भाष्य वेदों के महान विद्वानों—महर्षि दयानंद सरस्वती, दामोदर सातवलेकर एवं सायण टीका पर आधारित है। इस महत्त्वपूर्ण ग्रंथ का संपादन विद्वान सत्यवीर शास्त्री जी ने किया है।
इस संपूर्ण भाष्य में कुल ३६४४ पृष्ठ हैं, जिसमें चारों वेदों का विस्तारपूर्वक अर्थ एवं व्याख्या दी गई है। वेदों का यह भाष्य वेदों के गूढ़ रहस्यों को स्पष्ट करता है और आम पाठकों के लिए सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। यह ग्रंथ उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो वेदों का अध्ययन करना चाहते हैं लेकिन संस्कृत में पारंगत नहीं हैं। इसमें प्रत्येक मंत्र का सरल एवं स्पष्ट अर्थ दिया गया है, जिससे सामान्य हिंदी जानने वाला व्यक्ति भी इसे आसानी से पढ़ और समझ सकता है।
महर्षि दयानंद सरस्वती के वेदों पर किए गए गहन अध्ययन और उनके प्रबुद्ध व्याख्यानों को इस भाष्य में विशेष रूप से स्थान दिया गया है। दामोदर सातवलेकर एवं सायण की टीका के आधार पर इसमें वेदों की प्रामाणिक व्याख्या प्रस्तुत की गई है, जिससे यह ग्रंथ वेदों को समझने के इच्छुक सभी पाठकों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बन जाता है।
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