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Lokshilpi Delhi Nagar Nigam

Publisher:
Prabhat Prakashan
| Author:
Jagdish Mamgain
| Language:
Hindi
| Format:
Hardback
Publisher:
Prabhat Prakashan
Author:
Jagdish Mamgain
Language:
Hindi
Format:
Hardback

Original price was: ₹500.Current price is: ₹375.

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ISBN:
Page Extent:
35

हिंदुस्तान की राजधानी दिल्ली के नगरीय प्रशासन की यात्रा सन् 1862 में प्रारंभ हुई। आजादी के बाद सन् 1958 में वृहद अधिकारों के साथ दिल्ली नगर निगम की स्थापना हुई। दिल्ली को सजाने, सँवारने व सौंदर्यीकरण में निगम की अग्रणी भूमिका रही है।

दिल्ली की सबसे ऊँची इमारत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर निगम की कीर्ति का अनुपम उदाहरण है। हिंदुस्तान के सबसे बड़े निगमों में दिल्ली नगर निगम की गिनती होती है। नियमित शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण व शहरीकृत गाँव, अनधिकृत कॉलोनियाँ व अनधिकृत नियमित कॉलोनियाँ तथा पुनर्वास क्षेत्र—सभी के लिए निगम एक सेवादार की भूमिका में तत्पर है। दिल्ली व्यापारिक केंद्र है, साथ ही विज्ञापन जगत् के लिए एक आकर्षण भी। विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर नागरिक सुविधाएँ प्रदान करने व उच्च स्तर के निर्माण में निगम को महारथ हासिल है। बिजली, पानी, सीवर, परिवहन, अग्निशमन, सफाई, स्वास्थ्य, बागवानी, प्राथमिक शिक्षा, भवन निर्माण व संपत्ति कर जैसे सभी प्रमुख क्षेत्र दिल्ली नगर निगम की शक्ति का एहसास कराते थे, लेकिन बीते समय के साथ बिजली, पानी, सीवर, परिवहन व अग्निशमन निगम के अधिकार से बाहर हो जाने से निगम की शक्ति कुछ क्षीण-सी हो गई।

गौरवशाली अतीत व अद्भुत शिल्प कौशल दिल्ली नगर निगम की धरोहर हैं। केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल के बीच इस पर नियंत्रण रखने की उत्कंठा सदैव ही बनी रहती है। निगम रूपी रंग-बिरंगी बगिया में फूलों के साथ कुछ काँटे भी होते हैं, लेकिन फिर भी दिल्लीवालों के लिए एक भरोसे का नाम है—दिल्ली नगर निगम।

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Description

हिंदुस्तान की राजधानी दिल्ली के नगरीय प्रशासन की यात्रा सन् 1862 में प्रारंभ हुई। आजादी के बाद सन् 1958 में वृहद अधिकारों के साथ दिल्ली नगर निगम की स्थापना हुई। दिल्ली को सजाने, सँवारने व सौंदर्यीकरण में निगम की अग्रणी भूमिका रही है।

दिल्ली की सबसे ऊँची इमारत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर निगम की कीर्ति का अनुपम उदाहरण है। हिंदुस्तान के सबसे बड़े निगमों में दिल्ली नगर निगम की गिनती होती है। नियमित शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण व शहरीकृत गाँव, अनधिकृत कॉलोनियाँ व अनधिकृत नियमित कॉलोनियाँ तथा पुनर्वास क्षेत्र—सभी के लिए निगम एक सेवादार की भूमिका में तत्पर है। दिल्ली व्यापारिक केंद्र है, साथ ही विज्ञापन जगत् के लिए एक आकर्षण भी। विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर नागरिक सुविधाएँ प्रदान करने व उच्च स्तर के निर्माण में निगम को महारथ हासिल है। बिजली, पानी, सीवर, परिवहन, अग्निशमन, सफाई, स्वास्थ्य, बागवानी, प्राथमिक शिक्षा, भवन निर्माण व संपत्ति कर जैसे सभी प्रमुख क्षेत्र दिल्ली नगर निगम की शक्ति का एहसास कराते थे, लेकिन बीते समय के साथ बिजली, पानी, सीवर, परिवहन व अग्निशमन निगम के अधिकार से बाहर हो जाने से निगम की शक्ति कुछ क्षीण-सी हो गई।

गौरवशाली अतीत व अद्भुत शिल्प कौशल दिल्ली नगर निगम की धरोहर हैं। केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल के बीच इस पर नियंत्रण रखने की उत्कंठा सदैव ही बनी रहती है। निगम रूपी रंग-बिरंगी बगिया में फूलों के साथ कुछ काँटे भी होते हैं, लेकिन फिर भी दिल्लीवालों के लिए एक भरोसे का नाम है—दिल्ली नगर निगम।

About Author

जगदीश ममगाँई दिल्ली में ब्राह्मण परिवार में जनमे श्री जगदीश ममगाँई का सामाजिक व राजनैतिक संघर्ष 1981 में दिल्ली विश्‍वविद्यालय की छात्र राजनीति से प्रारंभ हुआ। उन्होंने विभिन्न कॉलेजों में सीटें बढ़वाने व प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए आठ दिन की भूख-हड़ताल की व धरने-प्रदर्शन का नेतृत्व किया। कानुपर की तीन बहनों द्वारा दहेज के अभाव में आत्महत्या करने से स्तब्‍ध श्री ममगाँई ने दिल्ली विश्‍वविद्यालय में दहेज-विरोधी रैली कर दहेज न लेने के संकल्प कार्यक्रम किए और उसे अपने जीवन में भी उतारा दिल्लीवासियों, विशेषकर युवाओं में नशे की बढ़ती लत के खिलाफ उन्होंने ‘स्वतंत्र प्रहरी’ नामक संस्‍था गठित की, जिसके तत्त्वावधान में हेल्‍थ कैंप, धरना-प्रदर्शन व गोष्‍ठ‌ियाँ आयोजित कीं। ‘रेस अगेंस्ट ड्रग्स’ में विभिन्न कॉलेजों के सैंकड़ों छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कश्मीर में आतंकवाद, मुजफ्फरनगर में उत्तराखंडी आंदोलनकारी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, औद्योगिक इकाइयों को उजाड़ने व सीलिंग के विरोध में उन्होंने प्रभावी भूमिका निभाई। श्री जगदीश ममगाँई वर्तमान में दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के अध्यक्ष व दिल्ली यूनिवर्सिटी कोर्ट के सदस्य हैं। इससे पूर्व वे कोटा विश्‍वविद्यालय की उप-कुलपति चयन सीमिति के अध्यक्ष, दिल्ली सरकार की कृषि विपणन समिति के उपाध्यक्ष, नेहरू युवा केंद्र की चयन समिति व टेलीफोन एडवाइजरी कमेटी के सदस्य रहे। उनकी ‘लोकशिल्पी-दिल्ली नगर निगम’ पुस्तक प्रकाशित हुई जिसमें निगम के अधिकार, कर्तव्य व कार्यप्रणाली का विवरण है समाचारपत्र-पत्रिकाओं में उनके लेख यथार्थवादी होते हैं। उनको जाननेवाले उनकी योग्यता, ईमानदारी व वाक्पटुता के कायन हैं।

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