MALMAL KACHCHE RANGON KI (HINDI)
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अंजुम रहबर ने गीत-ग़ज़लों के साहित्यिक एवं मूल्यात्मक क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना ली है I प्रस्तुत संग्रह की रचनाएं जीवन और जगत के अनेक रूपों और रंगों का मणि दर्पण हैं I – गोपालदास ‘नीरज’ अंजुम रहबर की ग़ज़ल की पहली पहचान यह है कि वो मोहब्बत की ग़ज़ल है I हमारे अहद की शयरात की शायरी की तारीख़ इस किताब के ज़िक्र के बग़ैर नामुकम्मल रहेगी I – डॉ. बशीर बद्र अंजुम रहबर उम्र के उस हिस्से से निकल आई हैं जहाँ संजीदगी पर हंसी आती है I जज़्बात की पाकीज़ा तर्जुमानी लहज़े का ठहराव और अश्कों की रौशनाई से ग़ज़ल के हाथ पीले करने के हुनर ने उन्हें सल्तनत-ए-शायरी की ग़ज़लज़ादी बना दिया है I – मुनव्वर राना
अंजुम रहबर ने गीत-ग़ज़लों के साहित्यिक एवं मूल्यात्मक क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बना ली है I प्रस्तुत संग्रह की रचनाएं जीवन और जगत के अनेक रूपों और रंगों का मणि दर्पण हैं I – गोपालदास ‘नीरज’ अंजुम रहबर की ग़ज़ल की पहली पहचान यह है कि वो मोहब्बत की ग़ज़ल है I हमारे अहद की शयरात की शायरी की तारीख़ इस किताब के ज़िक्र के बग़ैर नामुकम्मल रहेगी I – डॉ. बशीर बद्र अंजुम रहबर उम्र के उस हिस्से से निकल आई हैं जहाँ संजीदगी पर हंसी आती है I जज़्बात की पाकीज़ा तर्जुमानी लहज़े का ठहराव और अश्कों की रौशनाई से ग़ज़ल के हाथ पीले करने के हुनर ने उन्हें सल्तनत-ए-शायरी की ग़ज़लज़ादी बना दिया है I – मुनव्वर राना
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