Save: 25%
Save: 25%
Zinda Hone ka Sabut (HB)
Publisher:
| Author:
| Language:
| Format:
Publisher:
Author:
Language:
Format:
₹300 Original price was: ₹300.₹225Current price is: ₹225.
Save: 25%
Out of stock
Receive in-stock notifications for this.
Ships within:
Out of stock
ISBN:
Page Extent:
लोग कहते हैं, ‘सूरज को अँधेरी खाई में गिरते देखना अशुभ है।’ ‘अँधेरी खाई में कहाँ गिरता है सूरज। वह तो बस एक करवट लेकर हरे–भरे खेतों में उगी फ़सलों के बीच छिप जाता है, कुछ घंटों के बाद दोबारा अपना सफ़र शुरू करने के लिए। एक बार, आसमान पर छाये बादलों के एक आवारा टुकड़े ने खेतों की गोद में गिरते सूरज को पूरी तरह अपनी मुट्ठियों में बन्द कर लिया था। हम
दोनों कुछ लम्हों के लिए काँप गए थे। हमारे शहर का सूरज डूबने के पहले ही काले धब्बों की ओट में छिप गया था। मुझे नहीं मालूम, उस दिन और क्या हुआ था, पर मेरी और तुम्हारी आँखों ने कुछ लम्हों के बाद ही देखा कि सूरज आवारा बादलों की मुट्ठी से निकलकर दोबारा आसमान और ज़मीन जहाँ मिलते हैं, वहाँ दूर–दूर तक फैल गया और इसकी लाल–सुर्ख किरणों ने पूरे क्षितिज को अपने विशाल दायरे में समेट लिया।
जिन पाठकों ने जाबिर हुसेन की पिछली डायरियाँ पढ़ी हैं, उन्हें इस संकलन का नया कथा–शिल्प ज़रूर पसन्द आएगा।
लोग कहते हैं, ‘सूरज को अँधेरी खाई में गिरते देखना अशुभ है।’ ‘अँधेरी खाई में कहाँ गिरता है सूरज। वह तो बस एक करवट लेकर हरे–भरे खेतों में उगी फ़सलों के बीच छिप जाता है, कुछ घंटों के बाद दोबारा अपना सफ़र शुरू करने के लिए। एक बार, आसमान पर छाये बादलों के एक आवारा टुकड़े ने खेतों की गोद में गिरते सूरज को पूरी तरह अपनी मुट्ठियों में बन्द कर लिया था। हम
दोनों कुछ लम्हों के लिए काँप गए थे। हमारे शहर का सूरज डूबने के पहले ही काले धब्बों की ओट में छिप गया था। मुझे नहीं मालूम, उस दिन और क्या हुआ था, पर मेरी और तुम्हारी आँखों ने कुछ लम्हों के बाद ही देखा कि सूरज आवारा बादलों की मुट्ठी से निकलकर दोबारा आसमान और ज़मीन जहाँ मिलते हैं, वहाँ दूर–दूर तक फैल गया और इसकी लाल–सुर्ख किरणों ने पूरे क्षितिज को अपने विशाल दायरे में समेट लिया।
जिन पाठकों ने जाबिर हुसेन की पिछली डायरियाँ पढ़ी हैं, उन्हें इस संकलन का नया कथा–शिल्प ज़रूर पसन्द आएगा।
About Author
जाबिर हुसेन
अंग्रेज़ी भाषा एवं साहित्य के प्राध्यापक रहे। जेपी तहरीक में बेहद सक्रिय भूमिका निभाई। 1977 में मुंगेर से बिहार विधान सभा के लिए चुने गए। काबीना मंत्री बने। बिहार अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रहे।
बिहार विधान परिषद् के सभापति रहे। राज्य सभा के सदस्य रहे।
हिन्दी-उर्दू में दो दर्जन से ज़्यादा किताबें प्रकाशित। उर्दू-फ़ारसी की लगभग 50 पांडुलिपियों का सम्पादन। उर्दू-हिन्दी की कई पत्रिकाओं का सम्पादन।
प्रमुख कृतियाँ : ‘रेत से आगे’, ‘चाक पर रेत’, ‘ये शहर लगै मोहे बन’ (हिन्दी-उर्दू), ‘डोला बीबी का मज़ार’, ‘रेत पर खेमा’, ‘ज़िन्दा होने का सबूत’, ‘लोगाँ, जो आगे हैं’, ‘अतीत का चेहरा’, ‘आलोम लाजावा’, ‘ध्वनिमत काफी नहीं’, ‘दो चेहरों वाली एक नदी’ (गद्य); कविता—‘कातर आँखों ने देखा’, ‘रेत-रेत लहू’, ‘एक नदी रेत भरी’, ‘उर्दू—अंगारे और हथेलियाँ’, ‘सुन ऐ कातिब’, ‘बे-अमां’, ‘बिहार की पसमांदा मुस्लिम आबादियाँ’।
सम्पादन : छह जिल्दों में बहार हुसेनाबादी का सम्पूर्ण साहित्य, ‘मेरा सफ़र तवील है’ : अखतर पयामी, ‘दीवारे शब’, ‘दयारे शब’, ‘हिसारे शब’, ‘निगारे शब’ (उर्दूनामा के अंक)।
सम्मान : 2005 में उर्दू कथा-डायरी ‘रेत पर खेमा’ के लिए ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’। 2012 में नवें विश्व हिन्दी सम्मेलन (जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ़्रीका) में ‘विश्व हिन्दी सम्मान’।
Reviews
There are no reviews yet.
Related products
BUNI HUI RASSI
Save: 0%
Tilak
Save: 35%
Bharat Bharti
Save: 35%
Nainan Mein Aan-Baan I नैनन में आन-बान
Save: 25%
Ath Premanand Katha । अथ प्रेमानंद कथा
Save: 20%
HAMARA SAMVIDHAN BY SUBHASH KASHYAP HINDI
Save: 5%
Godavari: Aashcharya aur gyaan ki nadi
Save: 1%
Narmada: Shiv ke paseene se utpann hui nadi
Save: 1%
Saryu: Vishnu ke aansuon se prakat hui nadi
Save: 1%
Dravida Rajneeti : Periyar Se Jayalalithaa Tak | द्रविड़ राजनीति : पेरियार से जयललिता तक
Save: 20%
Wife Swapping
Save: 25%
Wife Swapping
Save: 20%
RELATED PRODUCTS
Aakhiri Ghari
Save: 35%
Aman Ke Farishtey
Save: 20%
Ath Premanand Katha । अथ प्रेमानंद कथा
Save: 20%
Barakhadi
Save: 20%
Bhagwan Buddha Aur Unka Dhamma
Save: 10%
Bharat Bharti
Save: 35%
Congress House
Save: 20%
Dhuadhar । धुआँधार
Save: 30%
Dravida Rajneeti : Periyar Se Jayalalithaa Tak | द्रविड़ राजनीति : पेरियार से जयललिता तक
Save: 20%
Ganga: Teenon lokon mein pravahit hone wali nadi
Save: 1%
Godavari: Aashcharya aur gyaan ki nadi
Save: 1%
Huma Ka Pankh
Save: 20%
Jaago Maa / जागो माँ
Save: 0%
Jaago Maa / जागो माँ
Save: 10%
Jeevan Samvad-3
Save: 20%
Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Andal
Save: 20%
Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Namdev
Save: 20%
Kautuk
Save: 0%
Main Barbad Hona Chahti Hoon | मैं बर्बाद होना चाहती हूँ
Save: 20%
Main Nastik Kyon Hoon?
Save: 20%
Maine Gandhi Ko Kyun Mara
Save: 1%
Mantra-Viplav
Save: 25%
Mirza Galib Ke Mashur Sheron Shayri
Save: 10%
Nainan Mein Aan-Baan I नैनन में आन-बान
Save: 25%
Narmada: Shiv ke paseene se utpann hui nadi
Save: 1%
Naya Bani Mohabbat Mein
Save: 20%
Premchand Ki Hindu-Muslim Sadbhav Kathayen
Save: 20%
Premchand Ki Stree Kathayen
Save: 20%
Roshani, Chhipkali Aur Patanga । रोशनी, छिपकली और पतंगा
Save: 20%
Saraswati: Vah nadi jo bahna band ho gayi
Save: 1%
Saryu: Vishnu ke aansuon se prakat hui nadi
Save: 1%
Shayari Sadabahar: Khushboo-Sa Bikharna Mera
Save: 20%
Shayari Sadabahar: Saye Se Mukhatib
Save: 20%
Shayari Sadabahar: Tumhare Baare Mein Keh Raha Tha
Save: 20%
Silwaton Bhari Rooh
Save: 20%
Tilak
Save: 35%
Ucchatar Arthik Siddhanth
Save: 15%
Upar Baitha Ek Nithalla
Save: 20%
UPSC 2025 – Vastunishth Bhugol, Paryavaran evam Paristhitiki(Hindi)
Save: 25%
White Nights । व्हाइट नाइट्स
Save: 1%
Wife Swapping
Save: 20%
Wife Swapping
Save: 25%
Yamuna: Manoram leelaon se judi nadi
Save: 1%
Yuddh Aur Shanti (1-4) | युद्ध और शान्ति (1-4)
Save: 30%
Zinda Rehne Ki Zid
Save: 20%
अमृत कुम्भ: हिन्दू भाव का मंगल कलश I Amrit Kumbh: Hindu Bhav Ka Mangal Kalash
Save: 30%
पोटली के दाने – आलोक कुमार मिश्रा
Save: 20%
विसर्जन (उपन्यास) — राजू शर्मा
Save: 20%
RECENTLY VIEWED
Dharmanomics : An Indigenous and Sustainable Economic Model
Save: 25%

Reviews
There are no reviews yet.