Save: 25%
Save: 25%
Zamane Se Do Do Hath (HB)
Publisher:
| Author:
| Language:
| Format:
Publisher:
Author:
Language:
Format:
₹595 Original price was: ₹595.₹446Current price is: ₹446.
Save: 25%
Out of stock
Receive in-stock notifications for this.
Ships within:
Out of stock
ISBN:
Page Extent:
प्रो. नामवर सिंह हिन्दी का चेहरा हैं। उनमें हिन्दी समाज, साहित्य-परम्परा और सर्जना की संवेदना रूपायित होती है। वे न सीमित अर्थों में साहित्यकार हैं और न आलोचक। वे हिन्दी में मानवतावादी, लोकतांत्रिक और समाजवादी विचारों की व्यापक स्वीकृति के लिए सतत संघर्षशील प्रगतिशील आन्दोलन के अग्रणी विचारक थे। स्वातंत्र्योत्तर भारतीय समाज और राजनीति की जनपक्षधर शक्तियों को उन्होंने अपनी वैचारिकता, आलोचकीय प्रतिभा और लोकसंवेदी-तर्कप्रवण वक्तृता से निरन्तर मज़बूत किया। वे देश में समतावादी समाज का सपना सँजोये रखनेवाली सामाजिक शक्तियों के पक्ष में सामन्तवादी-पुनरुत्थानवादी शक्तियों और पूँजीवादी शक्तियों से निरन्तर मुठभेड़ जारी रखनेवाले वैचारिक योद्धा थे। उन्होंने जहाँ एक ओर धर्म, लोक, परम्परा और संस्कृति के मानवीय मूल्यों पर ज़ोर देनेवाली विरासत की सटीक व्याख्या की है, वहीं इनको उपकरण बनाकर सामाजिक भेदों को स्वीकृत करानेवाले बौद्धिक प्रयत्नों के ख़िलाफ़ हमलावर तेवर भी अपनाए। उन्होंने परम्परा और आधुनिकता के मूल्यांकन की प्रगतिशील परम्परा को आगे बढ़ाया।
प्रस्तुत संग्रह में नामवर जी के विगत दो दशकों में दिए गए अनेक व्याख्यानों एवं वाचिक टिप्पणियों के साथ दो आलेख शामिल हैं, जिनमें भूमंडलीकरण, फासीवाद, साम्प्रदायिकता भाषा और संस्कृति के ज्वलन्त सवालों पर नामवर जी के विचार हिन्दी समाज की जड़ता को तोड़ने के क्रम में हमारे सामने आते हैं।
प्रो. नामवर सिंह हिन्दी का चेहरा हैं। उनमें हिन्दी समाज, साहित्य-परम्परा और सर्जना की संवेदना रूपायित होती है। वे न सीमित अर्थों में साहित्यकार हैं और न आलोचक। वे हिन्दी में मानवतावादी, लोकतांत्रिक और समाजवादी विचारों की व्यापक स्वीकृति के लिए सतत संघर्षशील प्रगतिशील आन्दोलन के अग्रणी विचारक थे। स्वातंत्र्योत्तर भारतीय समाज और राजनीति की जनपक्षधर शक्तियों को उन्होंने अपनी वैचारिकता, आलोचकीय प्रतिभा और लोकसंवेदी-तर्कप्रवण वक्तृता से निरन्तर मज़बूत किया। वे देश में समतावादी समाज का सपना सँजोये रखनेवाली सामाजिक शक्तियों के पक्ष में सामन्तवादी-पुनरुत्थानवादी शक्तियों और पूँजीवादी शक्तियों से निरन्तर मुठभेड़ जारी रखनेवाले वैचारिक योद्धा थे। उन्होंने जहाँ एक ओर धर्म, लोक, परम्परा और संस्कृति के मानवीय मूल्यों पर ज़ोर देनेवाली विरासत की सटीक व्याख्या की है, वहीं इनको उपकरण बनाकर सामाजिक भेदों को स्वीकृत करानेवाले बौद्धिक प्रयत्नों के ख़िलाफ़ हमलावर तेवर भी अपनाए। उन्होंने परम्परा और आधुनिकता के मूल्यांकन की प्रगतिशील परम्परा को आगे बढ़ाया।
प्रस्तुत संग्रह में नामवर जी के विगत दो दशकों में दिए गए अनेक व्याख्यानों एवं वाचिक टिप्पणियों के साथ दो आलेख शामिल हैं, जिनमें भूमंडलीकरण, फासीवाद, साम्प्रदायिकता भाषा और संस्कृति के ज्वलन्त सवालों पर नामवर जी के विचार हिन्दी समाज की जड़ता को तोड़ने के क्रम में हमारे सामने आते हैं।
About Author
नामवर सिंह
जन्म-तिथि : 28 जुलाई, 1926; जन्म-स्थान : बनारस ज़िले का जीयनपुर नामक गाँव। प्राथमिक शिक्षा बग़ल के गाँव आवाजापुर में। कमालपुर से मिडिल। बनारस के हीवेट क्षत्रिय स्कूल से मैट्रिक और उदयप्रताप कॉलेज से इंटरमीडिएट। 1941 में कविता से लेखक जीवन की शुरुआत। पहली कविता उसी साल ‘क्षत्रियमित्र’ पत्रिका (बनारस) में प्रकाशित। 1949 में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से बी.ए. और 1951 में वहीं से हिन्दी में एम.ए.। 1953 में उसी विश्वविद्यालय में व्याख्याता के रूप में अस्थायी पद पर नियुक्ति। 1956 में पीएच.डी. (‘पृथ्वीराज रासो की भाषा’)। 1959 में चकिया चन्दौली के लोकसभा चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार। चुनाव में असफलता के साथ विश्वविद्यालय से मुक्त। 1959-60 में सागर विश्वविद्यालय (म.प्र.) के हिन्दी विभाग में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर। 1960 से 1965 तक बनारस में रहकर स्वतंत्र लेखन। 1965 में ‘जनयुग’ साप्ताहिक के सम्पादक के रूप में दिल्ली में। इस दौरान दो वर्षों तक राजकमल प्रकाशन (दिल्ली) के साहित्यिक सलाहकार। 1967 से ‘आलोचना’ त्रैमासिक का सम्पादन। 1970 में जोधपुर विश्वविद्यालय (राजस्थान) के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष-पद पर प्रोफ़ेसर के रूप में नियुक्त। 1971 में कविता के नए प्रतिमान पर साहित्य अकादेमी का पुरस्कार। 1974 में थोड़े समय के लिए क.मा.मुं. हिन्दी विद्यापीठ, आगरा के निदेशक। उसी वर्ष जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (दिल्ली) के भारतीय भाषा केन्द्र में हिन्दी के प्रोफ़ेसर के रूप में योगदान। 1987 में वहीं से सेवा-मुक्त। अगले पाँच वर्षों के लिए वहीं पुनर्नियुक्ति। 1993 से 1996 तक राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फ़ाउंडेशन के अध्यक्ष। आलोचना त्रैमासिक के प्रधान सम्पादक। महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलाधिपति रहे। वे ‘आलोचना’ त्रैमासिक के प्रधान सम्पादक भी रहे।
प्रमुख कृतियाँ : बकलम ख़ुद, हिन्दी के विकास में अपभ्रंश का योग, आधुनिक साहित्य की प्रवृत्तियाँ, पृथ्वीराज रासो की भाषा, इतिहास और आलोचना, कहानी : नई कहानी, कविता के नए प्रतिमान, दूसरी परम्परा की खोज, वाद विवाद संवाद, आलोचक के मुख से, हिन्दी का गद्यपर्व, ज़माने से दो दो हाथ, कविता की ज़मीन ज़मीन की कविता, प्रेमचन्द और भारतीय समाज (आलोचना); कहना न होगा (साक्षात्कार); काशी के नाम (पत्र) आदि।
रामचन्द्र शुक्ल रचनावली सहित अनेक पुस्तकों का सम्पादन।
निधन : 19 फरवरी, 2019
Reviews
There are no reviews yet.
Related products
HAMARA SAMVIDHAN BY SUBHASH KASHYAP HINDI
Save: 5%
Ganga: Teenon lokon mein pravahit hone wali nadi
Save: 1%
Narmada: Shiv ke paseene se utpann hui nadi
Save: 1%
Yamuna: Manoram leelaon se judi nadi
Save: 1%
Yuddh Aur Shanti (1-4) | युद्ध और शान्ति (1-4)
Save: 30%
Dhuadhar । धुआँधार
Save: 30%
Days at the Morisaki Bookshop | मोरीसाकी बुकशॉप के खुशनुमा दिन
Save: 30%
Wife Swapping
Save: 20%
Jaago Maa / जागो माँ
Save: 0%
Kautuk
Save: 0%
Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Andal
Save: 20%
Jeevan Samvad-3
Save: 20%
RELATED PRODUCTS
Aman Ke Farishtey
Save: 20%
Andhere Mein Jalta Ek Chirag
Save: 20%
Barakhadi
Save: 20%
Bhagwan Buddha Aur Unka Dhamma
Save: 10%
Bharat KI Sarawat Sadhana
Save: 30%
Bharat KI Sarawat Sadhana
Save: 25%
Congress House
Save: 20%
Damnak Jahanabadi Ki Vifal-Gatha
Save: 20%
Days at the Morisaki Bookshop | मोरीसाकी बुकशॉप के खुशनुमा दिन
Save: 30%
Dhuadhar । धुआँधार
Save: 30%
Dravida Rajneeti : Periyar Se Jayalalithaa Tak | द्रविड़ राजनीति : पेरियार से जयललिता तक
Save: 20%
Ganga: Teenon lokon mein pravahit hone wali nadi
Save: 1%
HAMARA SAMVIDHAN BY SUBHASH KASHYAP HINDI
Save: 5%
Huma Ka Pankh
Save: 20%
Jaago Maa / जागो माँ
Save: 10%
Jeevan Samvad-3
Save: 20%
Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Andal
Save: 20%
Kaaljayi Kavi Aur Unka Kavya: Namdev
Save: 20%
Kautuk
Save: 0%
Kinaya
Save: 20%
Main Nastik Kyon Hoon?
Save: 20%
Maine Gandhi Ko Kyun Mara
Save: 1%
Mantra-Viplav
Save: 25%
Meri Jail Diary
Save: 20%
Mirza Galib Ke Mashur Sheron Shayri
Save: 10%
Narmada: Shiv ke paseene se utpann hui nadi
Save: 1%
Naya Bani Mohabbat Mein
Save: 20%
Premchand Ki Hindu-Muslim Sadbhav Kathayen
Save: 20%
Premchand Ki Stree Kathayen
Save: 20%
Roshani, Chhipkali Aur Patanga । रोशनी, छिपकली और पतंगा
Save: 20%
Sampoorna Madhya Pradesh Samanya Adhyayan 4th edition (Hindi)
Save: 25%
Saraswati: Vah nadi jo bahna band ho gayi
Save: 1%
Saryu: Vishnu ke aansuon se prakat hui nadi
Save: 1%
Shayari Sadabahar: Khushboo-Sa Bikharna Mera
Save: 20%
Shayari Sadabahar: Saye Se Mukhatib
Save: 20%
Silwaton Bhari Rooh
Save: 20%
Ucchatar Arthik Siddhanth
Save: 15%
Upar Baitha Ek Nithalla
Save: 20%
UPSC 2025 – Vastunishth Bhugol, Paryavaran evam Paristhitiki(Hindi)
Save: 25%
UPSC 2025 – Vastunishth Vigyan evam Praudyogiki 3rd edition (Hindi)
Save: 25%
UPSC 2026 – Samanya Adhyayan Paper I – 15 Years Solved Papers 2011-2025 (Hindi)
Save: 25%
Wife Swapping
Save: 20%
Wife Swapping
Save: 25%
Yamuna: Manoram leelaon se judi nadi
Save: 1%
Zinda Rehne Ki Zid
Save: 20%
अमृत कुम्भ: हिन्दू भाव का मंगल कलश I Amrit Kumbh: Hindu Bhav Ka Mangal Kalash
Save: 30%
पानी का शाप : बिहार में बाढ़-सुखाड़ I Pani Ka Shap : Bihar Mein Badh-Sukhad
Save: 25%
पोटली के दाने – आलोक कुमार मिश्रा
Save: 20%
विसर्जन (उपन्यास) — राजू शर्मा
Save: 20%
हृदय दीप तथा अन्य चयनित कहानियाँ I Heart Lamp Hindi
Save: 20%
RECENTLY VIEWED
Murder on the orient express
Save: 15%
Wipe Clean: Early Learning Activity Book
Save: 20%
Sweekar Ka Jadoo
Save: 20%
DISTRIBUTED SYSTEMS: PRINCIPLES AND PARADIGMS, 2 ED
Save: 20%

Reviews
There are no reviews yet.