Thoda Sa Khula Asman (HB)
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उपन्यास की कहानी पूर्वी जर्मनी की पृष्ठभूमि पर रची गयी है, जिसकी आर्थिक-सामाजिक व्यवस्था मार्क्सवादी सिद्धान्तों पर आधारित थी। साम्यवादी व्यवस्था की स्थापना के प्रयास में दमनकारी नीतियों का पालन हुआ जिससे भय का एक ऐसा वातावरण पैदा हुआ कि लोग डरे-सहमें रहते। गुलामों की तरह जिन्दगी जीते। किन्तु एक दिन जब जन-जन के मन में व्याप्त असन्तोष की आग भभक उठी, तब पूरी व्यवस्था जलकर राख हो गयी। कम्युनिस्ट शासन का अन्त हो गया। लोग स्वतन्त्र हो गये…।
बर्लिन की दीवाल ढहने के बाद मची भगदड़ में हजारों परिवार बिखर गये। आल्फ्रेड की पत्नी का मनोरोग-चिकित्सा-संस्थान पहुँच जाना तथा आजादी की मशाल जलाने वाले जुर्गेन का जहर देकर मार दिया जाना, उस त्रासदी के बस उदाहरण मात्र थे…।
उपन्यास की कहानी पूर्वी जर्मनी की पृष्ठभूमि पर रची गयी है, जिसकी आर्थिक-सामाजिक व्यवस्था मार्क्सवादी सिद्धान्तों पर आधारित थी। साम्यवादी व्यवस्था की स्थापना के प्रयास में दमनकारी नीतियों का पालन हुआ जिससे भय का एक ऐसा वातावरण पैदा हुआ कि लोग डरे-सहमें रहते। गुलामों की तरह जिन्दगी जीते। किन्तु एक दिन जब जन-जन के मन में व्याप्त असन्तोष की आग भभक उठी, तब पूरी व्यवस्था जलकर राख हो गयी। कम्युनिस्ट शासन का अन्त हो गया। लोग स्वतन्त्र हो गये…।
बर्लिन की दीवाल ढहने के बाद मची भगदड़ में हजारों परिवार बिखर गये। आल्फ्रेड की पत्नी का मनोरोग-चिकित्सा-संस्थान पहुँच जाना तथा आजादी की मशाल जलाने वाले जुर्गेन का जहर देकर मार दिया जाना, उस त्रासदी के बस उदाहरण मात्र थे…।
About Author
रामकठिन सिंह
जन्म : 1 फरवरी, 1942, ग्राम-ताजोपुर, जनपद-मऊ (उ.प्र.)
शिक्षा : एम.एस-सी. (कृषि), रोस्टक विश्वविद्यालय (जर्मनी) से पी-एच.डी.
गतिविधियाँ : कई वर्षों तक हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में अध्यापन एवं शोध-कार्य; नरेन्द्रदेव कृषि-विश्वविद्यालय, फैजाबाद में निदेशक (शोध); अन्तरराष्ट्रीय धान-अनुसंधान-संस्थान, फिलीपीन्स के प्रतिनिधि एवं परियोजना-संयोजक, राष्ट्रीय कृषि-विज्ञान-अकादमी, नयी दिल्ली के सचिव, उपाध्यक्ष आदि पदों पर कार्य करने का अनुभव; 200 से अधिक शोध-पत्र एवं 20 पुस्तकें प्रकाशित।
साहित्य सेवा : 'मेरी गुड़िया' हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत, खण्डकाव्य, 'तारे जमीं के'–बालकाव्य संग्रह, 'आस-पास', बूढ़ी आवाज, 'मेरी आवाज सुनो' – कहानी संग्रह। 'झाँककर जो देखा'- लघुकथा संग्रह।
प्रधान सम्पादक शब्दिता'–अर्द्धवार्षिक साहित्यिक पत्रिका', नन्द प्रसार ज्योति–अर्द्धवार्षिक कृषि-विज्ञान पत्रिका।
सम्मान : महिन्द्रा समृद्धि इण्डिया-एग्री अवार्ड-2012; लोकमत सम्मान-2018; सिपानी एग्री-एशिया कृषि-अनुसंधान सम्मान-2005, पूर्वांचल साहित्य परिषद्, मऊ द्वारा सारस्वत सम्मान-2012; सुधाविन्दु सम्मान-2013; अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य कला-मंच द्वारा साहित्यकार सम्मान-2013 (काठमाण्डू, नेपाल) 'डॉ. रामप्यारे तिवारी स्मृति-सम्मान-2013' साहित्य भूषण सम्मान-2014 (उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा ) इत्यादि।
सम्प्रति : निदेशक, नन्द एजुकेशनल फाउण्डेशन फार रूरल डेवलपमेण्ट (नेफोर्ड), 1, देवलोक कॉलोनी, चर्च रोड, विष्णुपुरी, अलीगंज, लखनऊ-226022, उत्तर प्रदेश (भारत)
ईमेल : rksingh.neford@gmail.com
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