हिमालय में तेरह मास: एक भिक्षु का साधना-वृत्तान्त I Thirteen Months In The Himalayas

Publisher:
Manjul Publishing House
| Author:
Om Swami
| Language:
Hindi
| Format:
Paperback
Publisher:
Manjul Publishing House
Author:
Om Swami
Language:
Hindi
Format:
Paperback

Original price was: ₹350.Current price is: ₹280.

Save: 20%

In stock

Ships within:
7-10 Days

In stock

Book Type

ISBN:
SKU 9789355436443 Categories , Tag
Categories: ,
Page Extent:
170
यदि आपको उनके दर्शन नहीं होंगे तो किसे होंगे ?’ अपने हृदय में गूँजते भैरवी माँ के इन शब्दों को लेकर एक युवा भिक्षु, करोड़ों डॉलर का व्यावसायिक साम्राज्य त्याग कर हिमालय चले गए। वहाँ उन्होंने तेरह माह गहन ध्यान में व्यतीत किए जिसका उन्हें सर्वोत्तम पुरस्कार मिला : आत्म-साक्षात्कार। यद्यपि उन शांत किन्तु निर्जन पर्वतों में वास्तव में हुआ क्या? कड़ाके की शीत, वन्य पशु, क्षुधा एवं अत्यधिक एकाकीपन के मध्य, ओम स्वामीजी ने अपने मन और तन की सीमाओं का परीक्षण किया। घंटों साधना में बैठकर संघर्ष करते हुए वे पारलौकिक आनंद और भारी निराशा के क्षणों के बीच झूलते रहे। उन्होंने आध्यात्मिक साधना की कौन-सी पद्धतियाँ अपनाई? उन्होंने साधना की ‘चिंगारी’ को कैसे जीवंत रखा ? क्या ईश्वर तक पहुँचने के लिए अनुष्ठान पर्याप्त थे अथवा संदेह और भय ने इतने प्रज्ञावान व्यक्ति को भी व्याकुल बनाए रखा? हिमालय में तेरह मास में, ओम स्वामीजी के आत्म-साक्षात्कार की असाधारण यात्रा के दुर्लभ और मंत्रमुग्ध कर देने वाले वृत्तान्त की झलक मिलती है। बेस्टसेलिंग पुस्तक इफ़ ट्रुथ बी टोल्ड का यह अगला भाग है, जो आपको एक भिक्षु की आध्यात्मिक साधना के मर्म तथा ईश्वर-प्राप्ति की अटूट गहराई में ले जाता है।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “हिमालय में तेरह मास: एक भिक्षु का साधना-वृत्तान्त I Thirteen Months In The Himalayas”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Description
यदि आपको उनके दर्शन नहीं होंगे तो किसे होंगे ?’ अपने हृदय में गूँजते भैरवी माँ के इन शब्दों को लेकर एक युवा भिक्षु, करोड़ों डॉलर का व्यावसायिक साम्राज्य त्याग कर हिमालय चले गए। वहाँ उन्होंने तेरह माह गहन ध्यान में व्यतीत किए जिसका उन्हें सर्वोत्तम पुरस्कार मिला : आत्म-साक्षात्कार। यद्यपि उन शांत किन्तु निर्जन पर्वतों में वास्तव में हुआ क्या? कड़ाके की शीत, वन्य पशु, क्षुधा एवं अत्यधिक एकाकीपन के मध्य, ओम स्वामीजी ने अपने मन और तन की सीमाओं का परीक्षण किया। घंटों साधना में बैठकर संघर्ष करते हुए वे पारलौकिक आनंद और भारी निराशा के क्षणों के बीच झूलते रहे। उन्होंने आध्यात्मिक साधना की कौन-सी पद्धतियाँ अपनाई? उन्होंने साधना की ‘चिंगारी’ को कैसे जीवंत रखा ? क्या ईश्वर तक पहुँचने के लिए अनुष्ठान पर्याप्त थे अथवा संदेह और भय ने इतने प्रज्ञावान व्यक्ति को भी व्याकुल बनाए रखा? हिमालय में तेरह मास में, ओम स्वामीजी के आत्म-साक्षात्कार की असाधारण यात्रा के दुर्लभ और मंत्रमुग्ध कर देने वाले वृत्तान्त की झलक मिलती है। बेस्टसेलिंग पुस्तक इफ़ ट्रुथ बी टोल्ड का यह अगला भाग है, जो आपको एक भिक्षु की आध्यात्मिक साधना के मर्म तथा ईश्वर-प्राप्ति की अटूट गहराई में ले जाता है।

About Author

ओम स्वामीजी ने आध्यात्मिकता और स्वास्थ्य पर आधारित अपनी बेस्टसेलिंग पुस्तकों के माध्यम से दुनिया-भर में लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। सार्वजनिक चर्चा और ख्याति से दूर रहने वाले इन एकांतप्रिय रहस्यमयी साधु ने एक दशक बाद अपने संस्मरण का अगला भाग लिखा है। स्वामी जी 100 प्रतिशत निःशुल्क और अत्यंत लोकप्रिय ‘साधना' ऐप के संस्थापक हैं। वे इफ ट्रुथ बी टोल्ड : अ मॉन्क्स मेमॉयर, द लीजेंड ऑफ़ द गॉडेस तथा द एन्शिएंट साइंस ऑफ़ मंत्राज़ जैसी सर्वाधिक लोकप्रिय पुस्तकों के सुप्रसिद्ध लेखक भी हैं। आप उनके ब्लॉग os.me पर उनके विचार पढ़ सकते हैं और उनके बारे में अधिक जानकारी www.omswami.com पर प्राप्त कर सकते हैं।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “हिमालय में तेरह मास: एक भिक्षु का साधना-वृत्तान्त I Thirteen Months In The Himalayas”

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[wt-related-products product_id="test001"]

RELATED PRODUCTS

RECENTLY VIEWED