Sanjeev Paliwal Set Of 3 Books : Naina I Pishach I Yeh Ishq Nahin Aasaan
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1. नैना :
ब्रेकिंग न्यूज़: आज दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन इलाक़े के जॉगिंग पार्क में सुबह के तक़रीबन 6:15 बजे एक महिला की लाश बरामद हुई। कौन है यह महिला?
देश की लोकप्रिय न्यूज़ एंकर, मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक जाना-माना चेहरा, और नेशनल न्यूज़ चैनल की टीआरपी के लिए एक बड़ी ज़रूरत, नैना वशिष्ठ ख़ूबसूरत थी, एम्बिशियस थी, बहादुर और कामयाब भी। ज़ाहिर है नैना से सभी प्यार करते थे, लेकिन कुछ ईर्ष्या भी। और शोहरत के दाम तो देने पड़ते हैं।
ऐसे में उसका क़त्ल हुआ तो शक के घेरे में कई लोग आ गए…
टीवी की दुनिया की चमक-दमक के पीछे की सच्चाइयों से रूबरू कराता जाने-माने पत्रकार संजीव पालीवाल का यह उपन्यास आपको आख़री पन्ने तक सस्पेंस में रखेगा।
2. पिशाच : जाने-माने कवि, विचारक और पेंटर गजानन स्वामी नहीं रहे।दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित एक सोसाइटी में उनका क़त्ल होता है
कौन कर गया एक बुज़ुर्ग का क़त्ल? क़ातिल का क्या मक़सद था? और आख़िर क्यों क़त्ल के बाद क़ातिल दीवार पर ख़ून से बड़े-बड़े अक्षरों में लिख गया—‘पिशाच’?क्या संदेश छिपा है इसमें?उनकी हैरतअंगेज़ हत्या की ख़बर पूरे देश में आग की तरह फैल गयी। पुलिस अभी इसी गुत्थी को सुलझाने में मशक्कत कर रही थी कि सिलसिलेवार तरीक़े से कुछ और मशहूर लोगों का क़त्ल हो जाता है।कौन है रहस्यमयी क़ातिल?पहले उपन्यास नैना की अपार सफलता के बाद लेखक संजीव पालीवाल लौट रहे हैं एक और रोंगटे खड़े कर देने वाला क्राइम थ्रिलर लेकर।
3.ये इश्क़ नहीं आसां :
अमन एक लेखक है और अनन्या जैसलमेर में अपने विरासत होटल की मालकिन है, जिसे वह कर्ज़ चुकाकर किसी तरह सँभालने की कोशिश कर रही है। वे दोनों एक-दूसरे की ओर ऐसे खिंचे चले आते हैं जैसे चुम्बक के दो ध्रुव। जहाँ अमन अंतर्मुखी है, वहीं अनन्या जीवंत और उत्साह से भरी हुई है।
अमन का अपने पिता से मनमुटाव है क्योंकि उसकी माँ की मृत्यु के रहस्य पर परदा पड़ा हुआ है, और अनन्या ने अपने माता-पिता को एक दुर्घटना में खो दिया है। दोनों ही अपने-अपने प्रियजनों को खो चुके हैं, पर वे एक-दूसरे को इस सुरम्य शहर में पाते हैं, जो अमन की माँ की पहचान का रहस्य समेटे हुए है।
‘ये इश्क नहीं आसाँ’ जैसलमेर और वहाँ के लोगों की समृद्ध पृष्ठभूमि पर आधारित एक कोमल प्रेमकथा है। इसमें वे सभी तत्व हैं, जो एक अच्छी फ़िल्म बनाने के लिए आवश्यक होते हैं।
1. नैना :
ब्रेकिंग न्यूज़: आज दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन इलाक़े के जॉगिंग पार्क में सुबह के तक़रीबन 6:15 बजे एक महिला की लाश बरामद हुई। कौन है यह महिला?
देश की लोकप्रिय न्यूज़ एंकर, मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक जाना-माना चेहरा, और नेशनल न्यूज़ चैनल की टीआरपी के लिए एक बड़ी ज़रूरत, नैना वशिष्ठ ख़ूबसूरत थी, एम्बिशियस थी, बहादुर और कामयाब भी। ज़ाहिर है नैना से सभी प्यार करते थे, लेकिन कुछ ईर्ष्या भी। और शोहरत के दाम तो देने पड़ते हैं।
ऐसे में उसका क़त्ल हुआ तो शक के घेरे में कई लोग आ गए…
टीवी की दुनिया की चमक-दमक के पीछे की सच्चाइयों से रूबरू कराता जाने-माने पत्रकार संजीव पालीवाल का यह उपन्यास आपको आख़री पन्ने तक सस्पेंस में रखेगा।
2. पिशाच : जाने-माने कवि, विचारक और पेंटर गजानन स्वामी नहीं रहे।दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित एक सोसाइटी में उनका क़त्ल होता है
कौन कर गया एक बुज़ुर्ग का क़त्ल? क़ातिल का क्या मक़सद था? और आख़िर क्यों क़त्ल के बाद क़ातिल दीवार पर ख़ून से बड़े-बड़े अक्षरों में लिख गया—‘पिशाच’?क्या संदेश छिपा है इसमें?उनकी हैरतअंगेज़ हत्या की ख़बर पूरे देश में आग की तरह फैल गयी। पुलिस अभी इसी गुत्थी को सुलझाने में मशक्कत कर रही थी कि सिलसिलेवार तरीक़े से कुछ और मशहूर लोगों का क़त्ल हो जाता है।कौन है रहस्यमयी क़ातिल?पहले उपन्यास नैना की अपार सफलता के बाद लेखक संजीव पालीवाल लौट रहे हैं एक और रोंगटे खड़े कर देने वाला क्राइम थ्रिलर लेकर।
3.ये इश्क़ नहीं आसां :
अमन एक लेखक है और अनन्या जैसलमेर में अपने विरासत होटल की मालकिन है, जिसे वह कर्ज़ चुकाकर किसी तरह सँभालने की कोशिश कर रही है। वे दोनों एक-दूसरे की ओर ऐसे खिंचे चले आते हैं जैसे चुम्बक के दो ध्रुव। जहाँ अमन अंतर्मुखी है, वहीं अनन्या जीवंत और उत्साह से भरी हुई है।
अमन का अपने पिता से मनमुटाव है क्योंकि उसकी माँ की मृत्यु के रहस्य पर परदा पड़ा हुआ है, और अनन्या ने अपने माता-पिता को एक दुर्घटना में खो दिया है। दोनों ही अपने-अपने प्रियजनों को खो चुके हैं, पर वे एक-दूसरे को इस सुरम्य शहर में पाते हैं, जो अमन की माँ की पहचान का रहस्य समेटे हुए है।
‘ये इश्क नहीं आसाँ’ जैसलमेर और वहाँ के लोगों की समृद्ध पृष्ठभूमि पर आधारित एक कोमल प्रेमकथा है। इसमें वे सभी तत्व हैं, जो एक अच्छी फ़िल्म बनाने के लिए आवश्यक होते हैं।
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