Safal Chhatra
 Jeevan Ke 15 Gurumantra
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Paap Aur Punya
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Sahastrabahu

Publisher:
Prabhat Prakashan
| Author:
Guru Datt
| Language:
Hindi
| Format:
Paperback
Publisher:
Prabhat Prakashan
Author:
Guru Datt
Language:
Hindi
Format:
Paperback

Original price was: ₹400.Current price is: ₹320.

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7-10 Days

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ISBN:
Categories: ,
Page Extent:
288

यशस्वी रचनाकार स्व. गुरुदत्त ने रसायन विज्ञान (कैमिस्ट्री) में एम.एस-सी. की और गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर (अब पाकिस्तान में) में प्रोफेसर के पद पर कार्य किया। स्वाधीनता आंदोलन से जुड़ने पर पद से त्याग-पत्र दे दिया। तत्पश्चात आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त किया और उसे ही अपना कार्यक्षेत्र बनाया; साथ-ही-साथ उपनिषदों और वेदों का गहन अध्ययन किया।
लेकिन नियति उन्हें बचपन से ही लिखने की प्रेरणा दे रही थी। शीघ्र ही वे उपन्यास-जगत में छा गए। उन्होंने अपने उपन्यासों के पात्रों द्वारा पाठकों को भिन्‍न- भिन्‍न विषयों का ज्ञान दिया। विज्ञान के प्रोफेसर यशस्वी लेखक ने अपने उपन्यास ‘सहस्रबाहु’ में पाठकों को अत्यंत रुचिकर विधि से आधुनिक विज्ञान व प्राचीन भारतीय विज्ञान की जानकारी दी है।

उपन्यास का एक पात्र बताता है कि इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन व न्यूट्रॉन तो वेदों में वर्णित वरुण, मित्र एवं सोम ही हैं, और कैसे उनकी विभक्ति भयंकर ऊर्जा उत्पन्न करती है। यदि इन फॉर्मूलों की प्राप्तिएक आस्तिक वैज्ञानिक को होती है तो वह मानव कल्याण का साधन बन जाता है और नास्तिक वैज्ञानिक यही ज्ञान प्राप्त कर अशांति व सर्वनाश का कारण बन जाता है। महान्‌ उपन्यासशिलपी वैद्य गुरुदत्त की यह कृति रोचक होने के साथ-साथ शिक्षाप्रद भी है। – पदमेश दत्त

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Description

यशस्वी रचनाकार स्व. गुरुदत्त ने रसायन विज्ञान (कैमिस्ट्री) में एम.एस-सी. की और गवर्नमेंट कॉलेज, लाहौर (अब पाकिस्तान में) में प्रोफेसर के पद पर कार्य किया। स्वाधीनता आंदोलन से जुड़ने पर पद से त्याग-पत्र दे दिया। तत्पश्चात आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त किया और उसे ही अपना कार्यक्षेत्र बनाया; साथ-ही-साथ उपनिषदों और वेदों का गहन अध्ययन किया।
लेकिन नियति उन्हें बचपन से ही लिखने की प्रेरणा दे रही थी। शीघ्र ही वे उपन्यास-जगत में छा गए। उन्होंने अपने उपन्यासों के पात्रों द्वारा पाठकों को भिन्‍न- भिन्‍न विषयों का ज्ञान दिया। विज्ञान के प्रोफेसर यशस्वी लेखक ने अपने उपन्यास ‘सहस्रबाहु’ में पाठकों को अत्यंत रुचिकर विधि से आधुनिक विज्ञान व प्राचीन भारतीय विज्ञान की जानकारी दी है।

उपन्यास का एक पात्र बताता है कि इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन व न्यूट्रॉन तो वेदों में वर्णित वरुण, मित्र एवं सोम ही हैं, और कैसे उनकी विभक्ति भयंकर ऊर्जा उत्पन्न करती है। यदि इन फॉर्मूलों की प्राप्तिएक आस्तिक वैज्ञानिक को होती है तो वह मानव कल्याण का साधन बन जाता है और नास्तिक वैज्ञानिक यही ज्ञान प्राप्त कर अशांति व सर्वनाश का कारण बन जाता है। महान्‌ उपन्यासशिलपी वैद्य गुरुदत्त की यह कृति रोचक होने के साथ-साथ शिक्षाप्रद भी है। – पदमेश दत्त

About Author

गुरुदत्त - 8 दिसंबर, 1894 को लाहौर (अब पाकिस्तान) में जनमे गुरुदत्त हिंदी साहित्य के देदीप्यमान नक्षत्र हैं। इन्हें 'क्रांतिकारियों का गुरु ' कहा जाता है । जब ये नेशनल कॉलेज, लाहोौर में हेडमास्टर थे, तो सरदार भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु इनके सबसे प्रिय शिष्य थे, जो बाद में आजादी की जंग में फाँसी का फंदा चूमकर अमर हो गए। उन्होंने दो सौ से अधिक उपन्यास लिखकर अपार ख्याति अर्जित की। संयुक्त राष्ट्र महासंघ के साहित्यिक संगठन 'यूनेस्को' द्वारा सन्‌ 1973 में जारी एक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार गुरुदत्त 1960-1970 के दशकों में हिंदी साहित्य में सर्वाधिक पढ़े जानेवाले लेखक रहे हैं। 'स्वाधीनता के पथ पर', 'स्वराज्य दान', 'दासता के नए रूप' (राजनीतिक उपन्यास), “कुमारसंभव', अग्नि-परीक्षा', “परित्राणाय साधूनाम्‌” (पौराणिक उपन्यास), 'पुष्यमित्र', “विक्रमादित्य ', 'पत्रलता', "गंगा की धारा (ऐतिहासिक उपन्यास) के साथ-साथ ' देश की हत्या' उनका सर्वाधिक चर्चित उपन्यास है। स्मृतिशेष : 8 अप्रैल, 1989।

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