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नव्या या नव्य I Navya ya Navy

Publisher:
Suruchi Prakashan
| Author:
Sonaali Mishra
| Language:
Hindi
| Format:
Paperback
Publisher:
Suruchi Prakashan
Author:
Sonaali Mishra
Language:
Hindi
Format:
Paperback

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यह पुस्तक “नय्या या नय्य” डॉ. सोनाली मिश्र की एक गहन और संवेदनशील कृति है, जो आज के समाज में स्त्री-पुरुष के बदलते संबंधों, लैंगिक भूमिकाओं और आधुनिकता की उलझनों को केंद्र में रखती है। यह उपन्यास प्रेम, आत्मस्वीकृति और पहचान की खोज के इर्द-गिर्द बुना गया है। इसमें लेखिका ने आज के युवाओं के भीतर व्याप्त प्रेम और भ्रम को बड़ी ही सहजता से प्रस्तुत किया है। कथा का नायक-नायिका, अपने भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर, सामाजिक मानदंडों से जूझते हैं और यही संघर्ष इस उपन्यास को जीवंत और अर्थपूर्ण बनाता है। लेखिका ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि सच्ची स्वतंत्रता बाहरी नहीं, बल्कि आत्मस्वीकृति में निहित है।

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Description

यह पुस्तक “नय्या या नय्य” डॉ. सोनाली मिश्र की एक गहन और संवेदनशील कृति है, जो आज के समाज में स्त्री-पुरुष के बदलते संबंधों, लैंगिक भूमिकाओं और आधुनिकता की उलझनों को केंद्र में रखती है। यह उपन्यास प्रेम, आत्मस्वीकृति और पहचान की खोज के इर्द-गिर्द बुना गया है। इसमें लेखिका ने आज के युवाओं के भीतर व्याप्त प्रेम और भ्रम को बड़ी ही सहजता से प्रस्तुत किया है। कथा का नायक-नायिका, अपने भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर, सामाजिक मानदंडों से जूझते हैं और यही संघर्ष इस उपन्यास को जीवंत और अर्थपूर्ण बनाता है। लेखिका ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि सच्ची स्वतंत्रता बाहरी नहीं, बल्कि आत्मस्वीकृति में निहित है।

About Author

डॉ. सोनाली मिश्र साहित्य जगत की एक प्रतिष्ठित लेखिका, अनुवादक और स्तंभकार हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी और अंग्रेजी—दोनों भाषाओं में समान अधिकार रखने वाली डॉ. मिश्र के लेख, अनुवाद और शोध कार्य कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्हें राष्ट्रीय पुस्तक न्यास सहित कई साहित्यिक संस्थानों से सम्मानित किया गया है। उनकी लेखनी में स्त्री-जीवन की गहराइयों, सामाजिक जटिलताओं और मनोवैज्ञानिक पहलुओं की सजीव अभिव्यक्ति मिलती है। संवेदना, आत्मचिंतन और विचार की गहराई उनके लेखन की पहचान है। “नय्या या नय्य” उनकी इसी सशक्त लेखन परंपरा का नवीन उदाहरण है, जो पाठकों को सोचने पर मजबूर करता है कि असल में ‘नय्या’ कौन है—वह जो बहाव में बहता है, या वह जो अपनी दिशा स्वयं तय करता है।

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