मुद्गलपुराणम् (‘रामा’ हिन्दी व्याख्या, एवं वैज्ञानिक विमर्श सहित)-Mudgala Purana (‘Rama’ with Hindi Explanation and Scientific Discussion) Set of 5 Volumes

Publisher:
Chaukhamba Krishnadas Academy
| Author:
Dr. Dalvir Singh Chauhan
| Language:
Sanskrit I Hindi
| Format:
Omnibus/Box Set (Hardback)
Publisher:
Chaukhamba Krishnadas Academy
Author:
Dr. Dalvir Singh Chauhan
Language:
Sanskrit I Hindi
Format:
Omnibus/Box Set (Hardback)

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Page Extent:
3500

मुद्गलपुराण प्राचीन अष्टादश महापुराणों में से एक विशिष्ट पुराण है, जिसमें भगवान गणपति के स्वरूप, महिमा, उपासना-पद्धति और दार्शनिक विवेचन का अत्यंत सुंदर एवं गहन प्रतिपादन किया गया है। यह पुराण विशेषतः उन साधकों और विद्वानों के लिए अमूल्य है जो गणेश-तत्व, पुराण-साहित्य और वैदिक परंपरा के गूढ़ रहस्यों को समझना चाहते हैं।

इस संस्करण की विशेषता यह है कि इसमें मूल संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ ’रामा’ हिन्दी व्याख्या दी गई है, जिससे सामान्य पाठक भी इसके दार्शनिक और आध्यात्मिक मर्म को सरलता से समझ सके। साथ ही प्रत्येक खण्ड में आधुनिक दृष्टिकोण से वैज्ञानिक विमर्श जोड़ा गया है, जो इस पुराण में उल्लिखित सिद्धांतों, प्रतीकों और आध्यात्मिक साधनाओं को समकालीन विज्ञान और तर्क के प्रकाश में स्पष्ट करता है।

ग्रंथ की प्रमुख विशेषताएँ

  • मूल संस्कृत पाठ: शुद्ध एवं प्रामाणिक स्वरूप में।

  • सरल हिन्दी व्याख्या: ’रामा’ शैली में, जो कठिन श्लोकों को सहज भाव में प्रस्तुत करती है।

  • वैज्ञानिक विश्लेषण: पुराण में उल्लिखित कथाओं एवं सिद्धांतों का आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर विवेचन।

  • पाँच खण्डों का समग्र संग्रह: सम्पूर्ण मुद्गलपुराण को शोधपरक रूप में एकत्रित किया गया है।

महत्व और उपयोगिता

यह ग्रंथ केवल धार्मिक आस्था का स्रोत नहीं है, बल्कि दार्शनिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसमें गणपति के बारह रूपों, उपासना-पद्धतियों, व्रतों और उनके आध्यात्मिक फल का वर्णन है। साथ ही साथ यह ग्रंथ यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार प्राचीन ऋषियों ने गूढ़ सत्य को प्रतीकों और कथाओं के माध्यम से जनसामान्य तक पहुँचाया।

निष्कर्ष

मुद्गलपुराणम् (’रामा’ हिन्दी व्याख्या एवं वैज्ञानिक विमर्श सहित, 5 खण्ड) विद्वानों, शोधकर्ताओं, अध्यात्म-जिज्ञासुओं और आम पाठकों सभी के लिए एक अनमोल निधि है। यह न केवल गणपति-तत्व को समझने का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि भारतीय पुराण-साहित्य की गहराई और उसकी वैज्ञानिक प्रासंगिकता को भी उजागर करता है।

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Description

मुद्गलपुराण प्राचीन अष्टादश महापुराणों में से एक विशिष्ट पुराण है, जिसमें भगवान गणपति के स्वरूप, महिमा, उपासना-पद्धति और दार्शनिक विवेचन का अत्यंत सुंदर एवं गहन प्रतिपादन किया गया है। यह पुराण विशेषतः उन साधकों और विद्वानों के लिए अमूल्य है जो गणेश-तत्व, पुराण-साहित्य और वैदिक परंपरा के गूढ़ रहस्यों को समझना चाहते हैं।

इस संस्करण की विशेषता यह है कि इसमें मूल संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ ’रामा’ हिन्दी व्याख्या दी गई है, जिससे सामान्य पाठक भी इसके दार्शनिक और आध्यात्मिक मर्म को सरलता से समझ सके। साथ ही प्रत्येक खण्ड में आधुनिक दृष्टिकोण से वैज्ञानिक विमर्श जोड़ा गया है, जो इस पुराण में उल्लिखित सिद्धांतों, प्रतीकों और आध्यात्मिक साधनाओं को समकालीन विज्ञान और तर्क के प्रकाश में स्पष्ट करता है।

ग्रंथ की प्रमुख विशेषताएँ

  • मूल संस्कृत पाठ: शुद्ध एवं प्रामाणिक स्वरूप में।

  • सरल हिन्दी व्याख्या: ’रामा’ शैली में, जो कठिन श्लोकों को सहज भाव में प्रस्तुत करती है।

  • वैज्ञानिक विश्लेषण: पुराण में उल्लिखित कथाओं एवं सिद्धांतों का आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर विवेचन।

  • पाँच खण्डों का समग्र संग्रह: सम्पूर्ण मुद्गलपुराण को शोधपरक रूप में एकत्रित किया गया है।

महत्व और उपयोगिता

यह ग्रंथ केवल धार्मिक आस्था का स्रोत नहीं है, बल्कि दार्शनिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसमें गणपति के बारह रूपों, उपासना-पद्धतियों, व्रतों और उनके आध्यात्मिक फल का वर्णन है। साथ ही साथ यह ग्रंथ यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार प्राचीन ऋषियों ने गूढ़ सत्य को प्रतीकों और कथाओं के माध्यम से जनसामान्य तक पहुँचाया।

निष्कर्ष

मुद्गलपुराणम् (’रामा’ हिन्दी व्याख्या एवं वैज्ञानिक विमर्श सहित, 5 खण्ड) विद्वानों, शोधकर्ताओं, अध्यात्म-जिज्ञासुओं और आम पाठकों सभी के लिए एक अनमोल निधि है। यह न केवल गणपति-तत्व को समझने का मार्ग प्रशस्त करता है, बल्कि भारतीय पुराण-साहित्य की गहराई और उसकी वैज्ञानिक प्रासंगिकता को भी उजागर करता है।

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