Main Hindu Kaise Bana: Ek Bauddhik Atmakatha

Publisher:
Voice of India
| Author:
Sita Ram Goel (1921-2003)
| Language:
Hindi
| Format:
Paperback
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Voice of India
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Sita Ram Goel (1921-2003)
Language:
Hindi
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Paperback

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“मैं हिन्दू कैसे बना: एक बौद्धिक आत्मकथा” सीता राम गोयल की एक प्रमुख पुस्तक है जो उनके व्यक्तिगत अनुभवों, विचारों और धार्मिक दर्शन के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है। इस पुस्तक में गोयल ने अपने जीवन के कुछ महत्वपूर्ण संघर्षों, विचारों, और धार्मिक अनुभवों का वर्णन किया है।

उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से उन समस्याओं और संकटों की चर्चा की है जिन्हें हिन्दू समाज और धर्म ने उन्हें पार करने के लिए प्रोत्साहित किया है। उनकी बातचीत उनकी धार्मिक प्रतिबद्धता और उनके विचारों की मजबूती को प्रकट करती है, और पाठकों को उनके संघर्षों से प्रेरित करती है।

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Description

“मैं हिन्दू कैसे बना: एक बौद्धिक आत्मकथा” सीता राम गोयल की एक प्रमुख पुस्तक है जो उनके व्यक्तिगत अनुभवों, विचारों और धार्मिक दर्शन के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है। इस पुस्तक में गोयल ने अपने जीवन के कुछ महत्वपूर्ण संघर्षों, विचारों, और धार्मिक अनुभवों का वर्णन किया है।

उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से उन समस्याओं और संकटों की चर्चा की है जिन्हें हिन्दू समाज और धर्म ने उन्हें पार करने के लिए प्रोत्साहित किया है। उनकी बातचीत उनकी धार्मिक प्रतिबद्धता और उनके विचारों की मजबूती को प्रकट करती है, और पाठकों को उनके संघर्षों से प्रेरित करती है।

About Author

Sita Ram Goel (16 October 1921 – 3 December 2003) was an Indian religious and political activist, writer and publisher in the late twentieth century. He had Marxist leanings during the 1940s, but later became an outspoken anti-communist and also wrote extensively on the damage to Indian culture and heritage wrought by expansionist Islam and missionary activities of Christianity. In his later career he emerged as a commentator on Indian politics, and adhered to Hindu nationalism.

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