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Jaago Maa / जागो माँ

Publisher:
Notion Press
| Author:
Ravi Singh Choudhary
| Language:
Hindi
| Format:
Paperback
Publisher:
Notion Press
Author:
Ravi Singh Choudhary
Language:
Hindi
Format:
Paperback

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SKU 9798902962588 Categories , Tag
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330

यह कथा एक छह वर्ष के बालक की महालया की भोर से आरंभ होती है। वही बालक आगे चलकर शक्ति के विविध रूपों से साक्षात्कार करता है—राजस्थान की वीरान मरुभूमि में स्थित तनोट माता से लेकर झारखंड के लोकदेवियों के वनों तक, बोकारो के पूजा पंडालों से लेकर काशी और कोलकाता की जीवंत चेतना तक, और अंततः कश्मीर की आध्यात्मिक एवं तात्त्विक गहराइयों तक।

कुरा के गणक ठाकुर की रहस्यमयी पांडुलिपियाँ, कोलबेंडी की अकालबोधन साधना, दक्षिणेश्वर की काली, तंत्र–मंत्र–यंत्र का विज्ञान, पवित्र त्रिकोण में महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली के रूप में दैवी सत्ता का विभाजन, दश महाविद्याओं का गूढ़ विस्तार, और अंत में कश्मीर शैव दर्शन के छत्तीस तत्त्व—ये सभी इस यात्रा में क्रमशः उद्घाटित होते हैं।

जागो माँ उन सभी पाठकों के लिए है, जिन्होंने जीवन में किसी न किसी क्षण यह अनुभव किया है कि कोई अदृश्य शक्ति उनका मार्गदर्शन कर रही है और उनकी रक्षा कर रही है। स्मृतियों से आगे बढ़कर यह पुस्तक उन प्रश्नों की खोज बन जाती है, जो प्रत्येक साधक के अंतर्मन में उठते हैं—

यदि आदि शक्ति एक है, तो उसके इतने नाम क्यों हैं?
दुर्गा और छिन्नमस्तिका में क्या अंतर है?
मानव सभ्यता में देवी रूपों की कल्पना कितनी प्राचीन है?
जिन तंत्र और रहस्यवाद को अक्सर भय की दृष्टि से देखा जाता है, क्या वे सचमुच उतने अंधकारमय हैं, या उनमें चेतना का कोई गहन विज्ञान छिपा है?

जागो माँ स्मृति, अनुभव और दर्शन का संगम है—यह इस खोज की यात्रा है कि आधुनिक जीवन जीता हुआ एक साधारण मनुष्य किस प्रकार दैवी स्त्री तत्त्व को पहचान सकता है और उसे साकार कर सकता है।

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Description

यह कथा एक छह वर्ष के बालक की महालया की भोर से आरंभ होती है। वही बालक आगे चलकर शक्ति के विविध रूपों से साक्षात्कार करता है—राजस्थान की वीरान मरुभूमि में स्थित तनोट माता से लेकर झारखंड के लोकदेवियों के वनों तक, बोकारो के पूजा पंडालों से लेकर काशी और कोलकाता की जीवंत चेतना तक, और अंततः कश्मीर की आध्यात्मिक एवं तात्त्विक गहराइयों तक।

कुरा के गणक ठाकुर की रहस्यमयी पांडुलिपियाँ, कोलबेंडी की अकालबोधन साधना, दक्षिणेश्वर की काली, तंत्र–मंत्र–यंत्र का विज्ञान, पवित्र त्रिकोण में महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली के रूप में दैवी सत्ता का विभाजन, दश महाविद्याओं का गूढ़ विस्तार, और अंत में कश्मीर शैव दर्शन के छत्तीस तत्त्व—ये सभी इस यात्रा में क्रमशः उद्घाटित होते हैं।

जागो माँ उन सभी पाठकों के लिए है, जिन्होंने जीवन में किसी न किसी क्षण यह अनुभव किया है कि कोई अदृश्य शक्ति उनका मार्गदर्शन कर रही है और उनकी रक्षा कर रही है। स्मृतियों से आगे बढ़कर यह पुस्तक उन प्रश्नों की खोज बन जाती है, जो प्रत्येक साधक के अंतर्मन में उठते हैं—

यदि आदि शक्ति एक है, तो उसके इतने नाम क्यों हैं?
दुर्गा और छिन्नमस्तिका में क्या अंतर है?
मानव सभ्यता में देवी रूपों की कल्पना कितनी प्राचीन है?
जिन तंत्र और रहस्यवाद को अक्सर भय की दृष्टि से देखा जाता है, क्या वे सचमुच उतने अंधकारमय हैं, या उनमें चेतना का कोई गहन विज्ञान छिपा है?

जागो माँ स्मृति, अनुभव और दर्शन का संगम है—यह इस खोज की यात्रा है कि आधुनिक जीवन जीता हुआ एक साधारण मनुष्य किस प्रकार दैवी स्त्री तत्त्व को पहचान सकता है और उसे साकार कर सकता है।

About Author

Ravi Singh Choudhary is a prolific author whose works bridge ancient wisdom and contemporary relevance. With a deep commitment to preserving and revitalizing traditional knowledge systems, He has authored several influential books, including Rishi Intelligence, Chanakya's Intelligence, and Vrikshayurveda Samhita.

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