ब्रोकन प्रॉमिसेज़: बिहार में जाति, अपराध और राजनीति I Broken Promises: Bihar mein Jaati, Apraadh aur Rajneeti (Hindi) (Signed Copy)
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यह पुस्तक बिहार की राजनीतिक यात्रा और सामाजिक यथार्थ का सजीव दस्तावेज़ है।
कभी बिहार वह भूमि थी जहाँ शिशुनाग, नंद, मौर्य, गुप्त और पाल जैसे महान साम्राज्य फले-फूले। यही वह धरती है जिसने बौद्ध और जैन धर्म जैसे महान दर्शन और जीवन-दृष्टियाँ विश्व को दीं। पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना), जो इन साम्राज्यों की राजधानी रहा, को यूनानी राजदूत मेगास्थनीज़ ने स्थानीय शासन का विकसित मॉडल बताया था।
लेकिन स्वतंत्र भारत के बाद वही बिहार धीरे-धीरे पिछड़ेपन, जातिगत असमानताओं, संगठित अपराध, भ्रष्टाचार और अल्पदृष्टि वाली राजनीति का पर्याय बन गया।
इस पुस्तक में लेखक ने बिहार की आज़ादी के बाद की राजनीति का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है—
कांग्रेस का लंबा शासन
कर्पूरी ठाकुर का जातीय फार्मूला
जेपी आंदोलन और उसमें उभरे लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जैसे नेता
लालू यादव का उदय और तथाकथित ‘जंगलराज’
बिहार का विभाजन
निजी सेनाओं और अपराधी-राजनेताओं का उभार
और फिर नीतीश कुमार का नेतृत्व
लेखक बताते हैं कि बिहार की यह यात्रा एक ओर तो अराजकता और पतन की कहानी है, और दूसरी ओर आंशिक सुधार एवं पुनर्निर्माण की भी झलक देती है।
‘ब्रोकन प्रॉमिसेज़’ केवल बिहार की किताब नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए महत्वपूर्ण है। यह दिखाती है कि किस प्रकार बिहार जैसे बड़े और जटिल समाज में हुई राजनीतिक उठापटक का असर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुँचता है।
यह पुस्तक बिहार की राजनीतिक यात्रा और सामाजिक यथार्थ का सजीव दस्तावेज़ है।
कभी बिहार वह भूमि थी जहाँ शिशुनाग, नंद, मौर्य, गुप्त और पाल जैसे महान साम्राज्य फले-फूले। यही वह धरती है जिसने बौद्ध और जैन धर्म जैसे महान दर्शन और जीवन-दृष्टियाँ विश्व को दीं। पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना), जो इन साम्राज्यों की राजधानी रहा, को यूनानी राजदूत मेगास्थनीज़ ने स्थानीय शासन का विकसित मॉडल बताया था।
लेकिन स्वतंत्र भारत के बाद वही बिहार धीरे-धीरे पिछड़ेपन, जातिगत असमानताओं, संगठित अपराध, भ्रष्टाचार और अल्पदृष्टि वाली राजनीति का पर्याय बन गया।
इस पुस्तक में लेखक ने बिहार की आज़ादी के बाद की राजनीति का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है—
कांग्रेस का लंबा शासन
कर्पूरी ठाकुर का जातीय फार्मूला
जेपी आंदोलन और उसमें उभरे लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जैसे नेता
लालू यादव का उदय और तथाकथित ‘जंगलराज’
बिहार का विभाजन
निजी सेनाओं और अपराधी-राजनेताओं का उभार
और फिर नीतीश कुमार का नेतृत्व
लेखक बताते हैं कि बिहार की यह यात्रा एक ओर तो अराजकता और पतन की कहानी है, और दूसरी ओर आंशिक सुधार एवं पुनर्निर्माण की भी झलक देती है।
‘ब्रोकन प्रॉमिसेज़’ केवल बिहार की किताब नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए महत्वपूर्ण है। यह दिखाती है कि किस प्रकार बिहार जैसे बड़े और जटिल समाज में हुई राजनीतिक उठापटक का असर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुँचता है।
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