Brihad-Anuvad-Chandrika: Anuvad-Vyakaran-Nibandhadivishay-Sanvalita
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बृहद्-अनुवाद-चन्द्रिका: अनुवाद-व्याकरण-निबंधादिविषय-संवलिता एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है, जो संस्कृत अनुवाद, व्याकरण तथा निबंध लेखन से संबंधित विषयों का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है। इस पुस्तक में संस्कृत से हिंदी तथा अन्य भाषाओं में अनुवाद की विभिन्न विधियों पर प्रकाश डाला गया है, जिससे छात्रों एवं शोधकर्ताओं को भाषा-परिवर्तन की प्रक्रिया को सुगमता से समझने में सहायता मिलती है। यह ग्रंथ विशेष रूप से उन विद्वानों के लिए उपयोगी है जो संस्कृत साहित्य, भाषा विज्ञान और अनुवाद शास्त्र में रुचि रखते हैं। इसमें संस्कृत व्याकरण के जटिल नियमों को सहज एवं सुबोध शैली में समझाया गया है, जिससे पाठक कठिन विषयों को भी सरलता से आत्मसात कर सकते हैं।
इस पुस्तक में निबंध लेखन के विभिन्न प्रकारों, उनकी शैली, स्वरूप और व्याकरणिक नियमों पर भी विस्तृत चर्चा की गई है। विशेष रूप से यह ग्रंथ उन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है जो संस्कृत भाषा में लेखन कौशल विकसित करना चाहते हैं। इसमें व्याकरणिक नियमों को उदाहरणों सहित स्पष्ट किया गया है, जिससे पाठकों को व्यावहारिक समझ प्राप्त होती है। यह पुस्तक संस्कृत भाषा के अध्ययन को गहराई से समझने के लिए एक व्यापक संदर्भ ग्रंथ के रूप में कार्य करती है और अनुवाद विज्ञान, व्याकरण तथा साहित्य के विभिन्न पहलुओं को समाहित करके भाषा-प्रेमियों एवं शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है।
बृहद्-अनुवाद-चन्द्रिका: अनुवाद-व्याकरण-निबंधादिविषय-संवलिता एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ है, जो संस्कृत अनुवाद, व्याकरण तथा निबंध लेखन से संबंधित विषयों का गहन अध्ययन प्रस्तुत करता है। इस पुस्तक में संस्कृत से हिंदी तथा अन्य भाषाओं में अनुवाद की विभिन्न विधियों पर प्रकाश डाला गया है, जिससे छात्रों एवं शोधकर्ताओं को भाषा-परिवर्तन की प्रक्रिया को सुगमता से समझने में सहायता मिलती है। यह ग्रंथ विशेष रूप से उन विद्वानों के लिए उपयोगी है जो संस्कृत साहित्य, भाषा विज्ञान और अनुवाद शास्त्र में रुचि रखते हैं। इसमें संस्कृत व्याकरण के जटिल नियमों को सहज एवं सुबोध शैली में समझाया गया है, जिससे पाठक कठिन विषयों को भी सरलता से आत्मसात कर सकते हैं।
इस पुस्तक में निबंध लेखन के विभिन्न प्रकारों, उनकी शैली, स्वरूप और व्याकरणिक नियमों पर भी विस्तृत चर्चा की गई है। विशेष रूप से यह ग्रंथ उन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है जो संस्कृत भाषा में लेखन कौशल विकसित करना चाहते हैं। इसमें व्याकरणिक नियमों को उदाहरणों सहित स्पष्ट किया गया है, जिससे पाठकों को व्यावहारिक समझ प्राप्त होती है। यह पुस्तक संस्कृत भाषा के अध्ययन को गहराई से समझने के लिए एक व्यापक संदर्भ ग्रंथ के रूप में कार्य करती है और अनुवाद विज्ञान, व्याकरण तथा साहित्य के विभिन्न पहलुओं को समाहित करके भाषा-प्रेमियों एवं शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है।
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