Apne Bachchon ko Kaise Khilayen?: Aur Iska Lutf Lein
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यह पुस्तक शिशुकाल से लेकर, उनके धीरे-धीरे बड़े होने और स्कूल जाने की आयु तक वाले आपके बच्चों को पारम्परिक भारतीय पौष्टिक भोजन के विषय को लेकर लिखी गई है। हमारी दादी और माँ के द्वारा स्वाद और सेहत को ध्यान में रखते हुए प्रयोग में लाई गई सामग्री, खाना बनाने की तरह-तरह की विधियाँ और हमें प्रेम से खिलाना ही इस पुस्तक का मूल आधार है। आसानी से बनाये गये ये व्यंजन आपके बच्चों को बहुत पसंद आयेंगें, ऐसा मेरा विश्वास है। इसमें दिन-प्रतिदिन के सामान्य भोजन से कुछ अलग हटकर – रुचिकर सूप़, स्वादिष्ट शाकाहारी डिशेज़ और स्वास्थ्यप्रद स्नैक्स, नये-नये स्कूल टिफ़िन, त्यौहारों के खाने आदि अनेक व्यंजनों की विधियाँ दी गईं हैं। यह पुस्तक न केवल भारत में, अपितु विश्व में रहने वाली भारतीय माताओं के लिए भी बहुत उपयोगी सिद्ध होगी। बच्चों को कैसे खिलायें (और इसका लुत्फ़ लें) ने आपकी माँ की रसोई की कल्पना को फिर से साकार कर दिया है। साथ ही आज की कामकाजी माताएं, जो अति व्यस्त होते हुए भी अपने बच्चे को पौष्टिक आहार देने का महव समझती हैं, यह पुस्तक उनके लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी। लेखिका के अपने दो बच्चों को बड़ा करने के अनुभवों पर आधारित इस पुस्तक के सभी व्यंजन कम समय में और सरलता से बनने वाले हैं। इस पुस्तक में खाने के पारम्परिक तरीकों के साथ साथ वैज्ञानिक जानकारी और आजकल के बच्चों की खाने के प्रति बदलती रुचियों को भी ध्यान में रखा गया है।
यह पुस्तक शिशुकाल से लेकर, उनके धीरे-धीरे बड़े होने और स्कूल जाने की आयु तक वाले आपके बच्चों को पारम्परिक भारतीय पौष्टिक भोजन के विषय को लेकर लिखी गई है। हमारी दादी और माँ के द्वारा स्वाद और सेहत को ध्यान में रखते हुए प्रयोग में लाई गई सामग्री, खाना बनाने की तरह-तरह की विधियाँ और हमें प्रेम से खिलाना ही इस पुस्तक का मूल आधार है। आसानी से बनाये गये ये व्यंजन आपके बच्चों को बहुत पसंद आयेंगें, ऐसा मेरा विश्वास है। इसमें दिन-प्रतिदिन के सामान्य भोजन से कुछ अलग हटकर – रुचिकर सूप़, स्वादिष्ट शाकाहारी डिशेज़ और स्वास्थ्यप्रद स्नैक्स, नये-नये स्कूल टिफ़िन, त्यौहारों के खाने आदि अनेक व्यंजनों की विधियाँ दी गईं हैं। यह पुस्तक न केवल भारत में, अपितु विश्व में रहने वाली भारतीय माताओं के लिए भी बहुत उपयोगी सिद्ध होगी। बच्चों को कैसे खिलायें (और इसका लुत्फ़ लें) ने आपकी माँ की रसोई की कल्पना को फिर से साकार कर दिया है। साथ ही आज की कामकाजी माताएं, जो अति व्यस्त होते हुए भी अपने बच्चे को पौष्टिक आहार देने का महव समझती हैं, यह पुस्तक उनके लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी। लेखिका के अपने दो बच्चों को बड़ा करने के अनुभवों पर आधारित इस पुस्तक के सभी व्यंजन कम समय में और सरलता से बनने वाले हैं। इस पुस्तक में खाने के पारम्परिक तरीकों के साथ साथ वैज्ञानिक जानकारी और आजकल के बच्चों की खाने के प्रति बदलती रुचियों को भी ध्यान में रखा गया है।
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