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Covid-19 : Sabhyata
 Ka Sankat Aur Samadhan
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AIIMS Mein Ek Jung Ladte Huye

Publisher:
Prabhat Prakashan
| Author:
Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’
| Language:
Hindi
| Format:
Hardback
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Prabhat Prakashan
Author:
Ramesh Pokhriyal ‘Nishank’
Language:
Hindi
Format:
Hardback

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7-10 Days

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ISBN:
Categories: ,
Page Extent:
186

कोरोना ‘‘हार कहाँ मानी है मैंने रार कहाँ ठानी है संघर्षों की गाथाएँ गायी है मैंने मुझे आज भी गानी है। मैं तो अपने पथ-संघर्षों का पालन करते आया हूँ। फिर कैसे पीछे हट जाऊँ मैं सौगंध धरा की खाया हूँ। क्यों आए तुम कोरोना मुझ तक अब तुमको तो बैरंग जाना है पूछ सको तो पूछो मुझको मैंने मन में क्या ठाना है। तुम्हें पता है मैं संघर्षों का दीप जलाने आया हूँ। फिर कैसे पीछे हट जाऊँ मैं सौगंध धरा की खाया हूँ। हार कहाँ मानी है मैंने रार कहाँ ठानी है। मैं तिल-तिल जल मिटा तिमिर को आशाओं को बोऊँगा, नहीं आज तक सोया हूँ अब कहाँ मैं सोऊँगा! देखो, इस घनघोर तिमिर में, मैं जीवन-दीप जलाया हूँ। फिर कैसे पीछे हट जाऊँ मैं सौगंध धरा की खाया हूँ। हार कहाँ मानी है मैंने रार कहाँ ठानी है संघर्षों की गाथाएँ गायी मुझे आज भी गानी है।’’ —रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ 6 मई, 2021, दिल्ली, एम्स कक्ष-704, प्रातः 7:00 बजे

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Description

कोरोना ‘‘हार कहाँ मानी है मैंने रार कहाँ ठानी है संघर्षों की गाथाएँ गायी है मैंने मुझे आज भी गानी है। मैं तो अपने पथ-संघर्षों का पालन करते आया हूँ। फिर कैसे पीछे हट जाऊँ मैं सौगंध धरा की खाया हूँ। क्यों आए तुम कोरोना मुझ तक अब तुमको तो बैरंग जाना है पूछ सको तो पूछो मुझको मैंने मन में क्या ठाना है। तुम्हें पता है मैं संघर्षों का दीप जलाने आया हूँ। फिर कैसे पीछे हट जाऊँ मैं सौगंध धरा की खाया हूँ। हार कहाँ मानी है मैंने रार कहाँ ठानी है। मैं तिल-तिल जल मिटा तिमिर को आशाओं को बोऊँगा, नहीं आज तक सोया हूँ अब कहाँ मैं सोऊँगा! देखो, इस घनघोर तिमिर में, मैं जीवन-दीप जलाया हूँ। फिर कैसे पीछे हट जाऊँ मैं सौगंध धरा की खाया हूँ। हार कहाँ मानी है मैंने रार कहाँ ठानी है संघर्षों की गाथाएँ गायी मुझे आज भी गानी है।’’ —रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ 6 मई, 2021, दिल्ली, एम्स कक्ष-704, प्रातः 7:00 बजे

About Author

साहित्य की विभिन्न विधाओं पर कलम चलानेवाले रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के अब तक कविता, कहानी, उपन्यास, पर्यटन, संस्कृति एवं बाल साहित्य पर एक सौ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साहित्य पर दो दर्जन से अधिक शोध और लघु शोध हुए हैं और कुछ हो रहे हैं। उनके साहित्य का अनुवाद अंग्रेजी, फ्रैंच, जर्मन, क्रिओल, स्पेनिश, एवं नेपाली आदि विदेशी भाषाओं सहित तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, गुजराती, मराठी, बाँग्ला, पंजाबी, असामिया, उर्दू, फारसी, संस्कृत सहित देश की अनेक भाषाओं में हुआ है। उत्कृष्ट साहित सृजन के लिए देश के चार राष्ट्रपतियों द्वारा राष्ट्रपति भवन में सम्मान एवं विश्व के एक दर्जन से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों तथा प्रधानमंत्रियों द्वारा अपने देश में आमंत्रित कर अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्रदत्त। मॉरीशस द्वारा ‘मॉरीशस सम्मान’, आप्रवासी भारतीयों के अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘गोपियो’ द्वारा ‘गोपियो अंतरराष्ट्रीय असाधारण उपलब्धि सम्मान’, नेपाल के प्रधानमंत्री द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय हिमाल गौरव सम्मान’, युगांडा के प्रधानमंत्री द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय मानवीय शिखर सम्मान’, भूटान के प्रधानमंत्री द्वारा ‘इंटरनेशनल हैप्पीनैस अवार्ड’ से विभूषित। हाल ही में लंदन में ‘वातायन अंतराष्ट्रीय शिखर सम्मान’, जर्मन, अमेरिका एवं कनाडा द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल जीनियस ग्लैक्सी अवार्ड’, नीदरलैंड में ‘अंतरराष्ट्रीय अजेय स्वर्ण पदक सम्मान’ एवं कैंब्रिज विश्वविद्यालय से सम्मान प्राप्त। लोकसभा सांसद, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री।

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