हिन्दुस्तान की कहानी (सम्पूर्ण) – A Complete Story on The Discovery of India

Publisher:
Sasta Sahitya Mandal Prakashan
| Author:
Jawahar Lal Nehru
| Language:
Hindi
| Format:
Paperback
Publisher:
Sasta Sahitya Mandal Prakashan
Author:
Jawahar Lal Nehru
Language:
Hindi
Format:
Paperback

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Page Extent:
662

‘हिन्दुस्तान की कहानी’ पंडित जवाहरलाल नेहरू की सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय कृतियों में से है। उन्होंने इसे अपनी नवीं और सबसे लम्बी कैद (9 अगस्त, 1942 से 15 जून, 1945) के दिनों में पांच महीनों के भीतर लिखा था।

जेल की दीवारों में बंद होने पर भी पंडितजी इस पुस्तक में भारत की खोज की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। वह हमें ईसा के कोई दो हज़ार साल पहले के उस जमाने में ले जाते हैं, जब सिंध की घाटी में एक विकसित और सम्पन्न सभ्यता फल-फूल रही थी, जिसके खंडहर आज भी हमें मोहनजोदडो, हड़प्पा तथा अन्य स्थानों पर मिलते हैं, वहां से इतिहास के विभिन्न और विविध दौरों का परिचय कराते हुए वह हमें आधुनिक काल और उसको बहुमुखी समस्याओं तक ले आते हैं। और फिर भविष्य की झांकी दिखाकर हमें खुद सोचने और समझने के लिए कहते हैं।

वह हमें भारत की शक्ति के उस अक्षय स्रोत से अवगत कराते हैं, जिसके कारण हमारा देश संघषों और हलचलों, उथल-पुथल और कश-मकश, साम्राज्य और विस्तार, पतन और गुलामी, विदेशी हमलों और आंतरिक क्रांतियों आदि के बावजूद जिंदा बना रहा है। लेखक का अध्ययन सभी दृष्टिकोण से – ऐतिहासिक, राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय कोई भी पहलू उनकी पैनी निगाह से नहीं बच पाया है। साथ ही पुस्तक में पाठकों को नेहरूजी की वह व्यक्तिगत छाप भी मिलती है, जिससे इस किताब को आत्मकथाओं की रोचकता, गति और सहृदयता से विभूषित कर दिया है।

पुस्तक 1945 में लिखी गई थी। उस समय पंडितजी ने, जिसे निकट भविष्य कहा था, वह आज वर्तमान हो गया है। पाठकों को पंडितजी के कई निष्कर्ष आज घटित होते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं।

यह पुस्तक लेखक की विश्वविख्यात ‘दि डिस्कवरी ऑव इंडिया’ का अनुवाद है। पाठकों को सम्भवतः पता होगा कि इसका संसार की लगभग सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और सभी जगह यह बड़ी लोकप्रिय हुई है।

हिंदी में भी इसका बहुत अच्छा स्वागत हुआ है। पहला संस्करण कुछ ही समय में समाप्त हो गया था और दूसरा संस्करण भी जल्दी ही निकल गया था। हमें हर्ष है कि पाठकों को अब इसका संस्करण नये रूप में सुलभ हो रहा है।

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‘हिन्दुस्तान की कहानी’ पंडित जवाहरलाल नेहरू की सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय कृतियों में से है। उन्होंने इसे अपनी नवीं और सबसे लम्बी कैद (9 अगस्त, 1942 से 15 जून, 1945) के दिनों में पांच महीनों के भीतर लिखा था।

जेल की दीवारों में बंद होने पर भी पंडितजी इस पुस्तक में भारत की खोज की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। वह हमें ईसा के कोई दो हज़ार साल पहले के उस जमाने में ले जाते हैं, जब सिंध की घाटी में एक विकसित और सम्पन्न सभ्यता फल-फूल रही थी, जिसके खंडहर आज भी हमें मोहनजोदडो, हड़प्पा तथा अन्य स्थानों पर मिलते हैं, वहां से इतिहास के विभिन्न और विविध दौरों का परिचय कराते हुए वह हमें आधुनिक काल और उसको बहुमुखी समस्याओं तक ले आते हैं। और फिर भविष्य की झांकी दिखाकर हमें खुद सोचने और समझने के लिए कहते हैं।

वह हमें भारत की शक्ति के उस अक्षय स्रोत से अवगत कराते हैं, जिसके कारण हमारा देश संघषों और हलचलों, उथल-पुथल और कश-मकश, साम्राज्य और विस्तार, पतन और गुलामी, विदेशी हमलों और आंतरिक क्रांतियों आदि के बावजूद जिंदा बना रहा है। लेखक का अध्ययन सभी दृष्टिकोण से – ऐतिहासिक, राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, दार्शनिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय कोई भी पहलू उनकी पैनी निगाह से नहीं बच पाया है। साथ ही पुस्तक में पाठकों को नेहरूजी की वह व्यक्तिगत छाप भी मिलती है, जिससे इस किताब को आत्मकथाओं की रोचकता, गति और सहृदयता से विभूषित कर दिया है।

पुस्तक 1945 में लिखी गई थी। उस समय पंडितजी ने, जिसे निकट भविष्य कहा था, वह आज वर्तमान हो गया है। पाठकों को पंडितजी के कई निष्कर्ष आज घटित होते हुए साफ दिखाई दे रहे हैं।

यह पुस्तक लेखक की विश्वविख्यात ‘दि डिस्कवरी ऑव इंडिया’ का अनुवाद है। पाठकों को सम्भवतः पता होगा कि इसका संसार की लगभग सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और सभी जगह यह बड़ी लोकप्रिय हुई है।

हिंदी में भी इसका बहुत अच्छा स्वागत हुआ है। पहला संस्करण कुछ ही समय में समाप्त हो गया था और दूसरा संस्करण भी जल्दी ही निकल गया था। हमें हर्ष है कि पाठकों को अब इसका संस्करण नये रूप में सुलभ हो रहा है।

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