ब्रोकन प्रॉमिसेज़: बिहार में जाति, अपराध और राजनीति I Broken Promises: Bihar mein Jaati, Apraadh aur Rajneeti (Hindi) (Signed Copy)

Publisher:
Ekadā
| Author:
Mrityunjay Sharma
| Language:
Hindi
| Format:
Paperback
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Ekadā
Author:
Mrityunjay Sharma
Language:
Hindi
Format:
Paperback

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312

यह पुस्तक बिहार की राजनीतिक यात्रा और सामाजिक यथार्थ का सजीव दस्तावेज़ है।

कभी बिहार वह भूमि थी जहाँ शिशुनाग, नंद, मौर्य, गुप्त और पाल जैसे महान साम्राज्य फले-फूले। यही वह धरती है जिसने बौद्ध और जैन धर्म जैसे महान दर्शन और जीवन-दृष्टियाँ विश्व को दीं। पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना), जो इन साम्राज्यों की राजधानी रहा, को यूनानी राजदूत मेगास्थनीज़ ने स्थानीय शासन का विकसित मॉडल बताया था।

लेकिन स्वतंत्र भारत के बाद वही बिहार धीरे-धीरे पिछड़ेपन, जातिगत असमानताओं, संगठित अपराध, भ्रष्टाचार और अल्पदृष्टि वाली राजनीति का पर्याय बन गया।

इस पुस्तक में लेखक ने बिहार की आज़ादी के बाद की राजनीति का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है—

  • कांग्रेस का लंबा शासन

  • कर्पूरी ठाकुर का जातीय फार्मूला

  • जेपी आंदोलन और उसमें उभरे लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जैसे नेता

  • लालू यादव का उदय और तथाकथित ‘जंगलराज’

  • बिहार का विभाजन

  • निजी सेनाओं और अपराधी-राजनेताओं का उभार

  • और फिर नीतीश कुमार का नेतृत्व

लेखक बताते हैं कि बिहार की यह यात्रा एक ओर तो अराजकता और पतन की कहानी है, और दूसरी ओर आंशिक सुधार एवं पुनर्निर्माण की भी झलक देती है।

‘ब्रोकन प्रॉमिसेज़’ केवल बिहार की किताब नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए महत्वपूर्ण है। यह दिखाती है कि किस प्रकार बिहार जैसे बड़े और जटिल समाज में हुई राजनीतिक उठापटक का असर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुँचता है।

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Description

यह पुस्तक बिहार की राजनीतिक यात्रा और सामाजिक यथार्थ का सजीव दस्तावेज़ है।

कभी बिहार वह भूमि थी जहाँ शिशुनाग, नंद, मौर्य, गुप्त और पाल जैसे महान साम्राज्य फले-फूले। यही वह धरती है जिसने बौद्ध और जैन धर्म जैसे महान दर्शन और जीवन-दृष्टियाँ विश्व को दीं। पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना), जो इन साम्राज्यों की राजधानी रहा, को यूनानी राजदूत मेगास्थनीज़ ने स्थानीय शासन का विकसित मॉडल बताया था।

लेकिन स्वतंत्र भारत के बाद वही बिहार धीरे-धीरे पिछड़ेपन, जातिगत असमानताओं, संगठित अपराध, भ्रष्टाचार और अल्पदृष्टि वाली राजनीति का पर्याय बन गया।

इस पुस्तक में लेखक ने बिहार की आज़ादी के बाद की राजनीति का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया है—

  • कांग्रेस का लंबा शासन

  • कर्पूरी ठाकुर का जातीय फार्मूला

  • जेपी आंदोलन और उसमें उभरे लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जैसे नेता

  • लालू यादव का उदय और तथाकथित ‘जंगलराज’

  • बिहार का विभाजन

  • निजी सेनाओं और अपराधी-राजनेताओं का उभार

  • और फिर नीतीश कुमार का नेतृत्व

लेखक बताते हैं कि बिहार की यह यात्रा एक ओर तो अराजकता और पतन की कहानी है, और दूसरी ओर आंशिक सुधार एवं पुनर्निर्माण की भी झलक देती है।

‘ब्रोकन प्रॉमिसेज़’ केवल बिहार की किताब नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए महत्वपूर्ण है। यह दिखाती है कि किस प्रकार बिहार जैसे बड़े और जटिल समाज में हुई राजनीतिक उठापटक का असर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुँचता है।

About Author

लेखक मृ‍त्युंजय शर्मा, जिन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई BIT मेसरा, रांची से और एमबीए XLRI, जमशेदपुर से किया है, लंबे समय तक एशियन पेंट्स में वरिष्ठ एचआर भूमिकाओं में कार्यरत रहे। बाद में उन्होंने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ विकास कार्यों में योगदान दिया। इसके बाद वे अपने गृह राज्य झारखंड लौटे और जमीनी स्तर पर सामाजिक सरोकारों से जुड़े। शर्मा biofie.com नामक जॉब पोर्टल स्टार्टअप के सह-संस्थापक हैं और कर्तव्यपथ नामक सामाजिक पहल चलाते हैं, जिसके अंतर्गत रांची में दो सौ से अधिक वंचित बच्चों को गणित पढ़ाया जाता है। वे IIM रायपुर समेत कई संस्थानों में अतिथि प्राध्यापक भी हैं। इस पृष्ठभूमि के साथ, लेखक ने अपने अनुभव और गहन शोध से बिहार की राजनीतिक यात्रा को सामने रखा है। पुस्तक में बताया गया है कि कैसे स्वतंत्रता के बाद बिहार ने कांग्रेस के लंबे शासन, कर्पूरी ठाकुर के जातीय समीकरण, जेपी आंदोलन, लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जैसे नेताओं का उदय, तथाकथित जंगलराज, निजी सेनाओं का प्रभाव और भ्रष्टाचार जैसे दौर देखे। साथ ही राज्य विभाजन और नीतीश कुमार के नेतृत्व में हुए बदलावों पर भी विस्तृत चर्चा की गई है।

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